अक्षय सुसाइड प्रकरण
साढ़े तीन साल पहले भी लाइन हाजिर हुए थे बिनौली इंस्पेक्टर
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत (बागपत)। तकरीबन साढ़े तीन साल पहले भी बिनौली थाना प्रभारी चंद्रकांत पांडेय लाइन हाजिर हुए थे। अवैध पशु कटान, अपराधियों से सांठगांठ, आपराधिक घटनाओं पर अंकुश न लगाने के आरोप लगे थे। एडीएम की जांच में आरोप सही पाए गए थे। मेरठ कमिश्नर ने शासन को रिपोर्ट भेजी थी। साथ ही तत्कालीन एसपी को आदेश दिया था कि चंद्रकांत पांडेय को कभी चार्ज न दिया जाए।
वर्ष 2017 में चंद्रकांत पांडेय को एसआई थे और उन पर बिनौली थाने का प्रभार था। इसी दौरान ग्रामीणों ने अवैध पशु कटान, अपराधियों से सांठगांठ, आपराधिक घटनाओं पर अंकुश न लगाने की शिकायत शासन-प्रशासन से की थी। इसके बाद तत्कालीन कमिश्नर मेरठ डॉ. प्रभात कुमार ने इसकी जांच एडीएम से कराई थी। एडीएम की जांच में ग्रामीणों की शिकायत सही पाई गई थी। इस रिपोर्ट के आधार पर कमिश्नर ने थाना प्रभारी चंद्रकांत पांडेय के खिलाफ कार्रवाई करते हुए शासन को रिपोर्ट भेजी थी। साथ ही तत्कालीन एसपी बागपत जयप्रकाश को भी आदेश दिया था कि इस उप निरीक्षक को कभी भविष्य में भी चार्ज ना दिया जाए। इसके बाद एसपी रहे जयप्रकाश ने चंद्रकांत पांडेय को छह दिसंबर 2017 को लाइन हाजिर कर दिया था। तब से चंद्रकांत पांडेय को कोई प्रभारी नहीं दिया गया था। इसी दौरान उनका प्रमोशन इंस्पेक्टर के पद पर हो गया। इसी वर्ष दो जून को एसपी ने उन्हें दोबारा बिनौली थाने का चार्ज दे दिया। एक माह 25 दिन बाद उन पर और उनके स्टाफ पर फिर से लापरवाही का आरोप लगा है।
महिला आरक्षी ने भी लगाया था आरोप
बिनौली थाने में तैनाती के दौरान चंद्रकांत पांडेय पर एक महिला आरक्षी ने अभद्रता सहित कई आरोप लगाए थे। एसपी ने इसकी जांच कराई थी, जिसमें वे दोषी पाए गए थे।