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सत्य और अहिंसा के बल पर सफलता संभव

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संवाद न्यूज एजेंसी
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बड़ौत। देश को अंग्रेजों से आजाद कराने में अहम भूमिका निभाने वाले महात्मा गांधी की आज पुण्यतिथि है। उनके सिद्धांत अहिंसा और सत्य देश के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं। देश को आजाद कराने के लिए आंदोलनों के दौरान कई अहम बातें कहीं। उनसे छात्र आज भी प्रेरणा ले रहे हैं। युवतियों का कहना है कि अहिंसा और सत्य के रास्ते पर चलते हुए सफलता हासिल कर सकते हैं।
अहिंसा सबसे बड़ी ताकत
अमृता का कहना है कि महात्मा गांधी ने अहिंसा के रास्ते पर चलकर भारत को आजाद कराया था। यह अहिंसा ही उनकी सबसे बड़ी ताकत थी। आज युवाओं को इसी से सीख लेनी चाहिए। हम अहिंसा के रास्ते पर चलते हैं तो सामने वाला स्वयं ही झुक जाएगा। इसीलिए हम सभी युवाओं को महात्मा गांधी द्वारा दिखाए गए रास्ते पर चलना चाहिए।
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आत्मनिर्भर बनने की सीख दी
रिया तोमर का कहना है कि महात्मा गांधी ने जीवन में आगे बढ़ने के लिए कई राह दिखाई हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात है कि आत्मनिर्भर बनो। सभी को जीवन में सफल होने के लिए इस संदेश को अपने जीवन में लाना ही पड़ेगा। यही संदेश ही हमें जीवन में सफल होने का रास्ता दिखाएगा।
सत्य के साथ आगे बढे़
रिया मलिक का कहना है कि महात्मा गांधी ने हमेशा सत्य की राह पर चलने का संदेश दिया है। हमें भी महात्मा गांधी द्वारा दिखाए इस रास्ते पर चलते हुए हमेशा सत्य का साथ देना चाहिए और जीवन में आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने सीख दी कि चाहे कोई भी परिस्थिति हो हमें सत्य का साथ नहीं छोड़ना है।
स्वस्थ्य रहने का संदेश दिया
साक्षी का कहना है कि महात्मा गांधी द्वारा की सीख हमें हमेशा स्वस्थ रहने का मार्ग दिखाती है। सादा खाना उचित मात्रा में खाना। इस रास्ते पर चलते हुए हम हमेशा स्वस्थ रह सकते हैं। इसी मार्ग पर चलते हुए गांधी ने सभी को उचित राह दिखाई और आजादी तक संघर्ष किया।
खुद पर अमल करना सिखाया
शिवानी का कहना है कि किसी भी बात को कहने से पहले उसे खुद पर अमल करना चाहिए। महात्मा गांधी जो भी बात कहते थे वे स्वयं पर लागू करते थे। उसके बाद किसी दूसरे को कहते थे। यही कारण था कि उनका इतना ज्यादा प्रभाव था।
अहिंसा की राह नहीं छोड़ी
पंडित घनश्याम शर्मा ने बताया कि जब देश में आजादी की लहर जोरों पर थी। महात्मा गांधी ने सच्चाई के रास्ते व अहिंसा के साथ देश को आजाद कराने की लड़ाई लड़ी। उन्होंने कभी भी अहिंसा का रास्ता नहीं छोड़ा।
बागपत के सपूत भी लड़े
सत्यपाल पथौलिया ने बताया कि बापू के आह्वान पर बगावत का तूफान उठ खड़ा हुआ था। बागपत के दर्जनों वीर सपूतों ने बापू के आंदोलन में हिस्सा लेकर आजादी की लड़ाई लड़ी। बताया कि महात्मा गांधी ने सभी आंदोलन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराए।
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नाम पड़ गया गांधी चौक
कांग्रेस के शहरध्यक्ष राकेश शर्मा ने बताया कि महात्मा गांधी ने वर्ष 1942 के दौरान नगर में एक सभा की थी। उन्होंने वहां पर झंडा फहराया था। उस जगह का नाम गांधी चौक पड़ गया। कांग्रेसी आज भी वहां 15 अगस्त व 26 जनवरी पर ध्वज फहराते हैं।
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