किसान नरेश यादव के घर 25 अक्तूबर 1999 को जन्म लेने वाले सचिन यादव का सपना क्रिकेटर बनना था। साढ़े छह फीट लंबे सचिन 2018 तक क्रिकेट खेलते थे और खेकड़ा की टीम के विकेटकीपर होने के साथ ही बल्लेबाजी थे। सचिन ने अपने पड़ोस में रहने वाले भाला फेंक के खिलाड़ी संदीप यादव को प्रैक्टिस करते देखा तो भाला फेंककर देखने लगे। सचिन ने पहली बार में 57.5 मीटर दूर भाला फेंका तो संदीप ने उनको एथलेटिक्स में कॅरियर बनाने के लिए प्रेरित किया।
सचिन ने तभी से भाला फेंकना शुरू कर दिया। पिता नरेश यादव व बड़े भाई विपिन ने खेती करके सचिन को खेल में पूरा सहयोग किया। हालांकि सचिन प्रैक्टिस करने के साथ ही खेती में पिता का हाथ बंटाते थे। सचिन ने भाला फेंक में बेहतर प्रदर्शन करना शुरू किया और स्टेट व नेशनल में पदक जीते तो खेल कोटे से यूपी पुलिस में तीन साल पहले भर्ती हो गए। वह इस समय गौतमबुद्धनगर में सिपाही हैं।
86.27 मीटर दूर भाला फेंककर नीरज व अरशद को पीछे छोड़ा
टोक्यो में चल रही वल्र्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में सचिन यादव ने पहले ही प्रयास में अपने कॅरियर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो किया। पहले प्रयास में सचिन ने 86.27 मीटर दूर भाला फेंका।
ओलंपिक के स्वर्ण पदक विजेता नीरज आठवें और पाकिस्तानी खिलाड़ी अरशद नदीम दसवें स्थान पर रहे। ऐसे में सचिन यादव नया सितारा बनकर उभरते दिख रहे हैं। यह ऐसे ही नहीं कहा जा रहा है बल्कि सचिन ने एशियाई चैंपियनशिप में रजत पदक जीता था। इसके अलावा देहरादून में हुए 38वें राष्ट्रीय खेलों में 84.39 मीटर के मीट रिकॉर्ड थ्रो के साथ सचिन ने स्वर्ण पदक जीता था।
87 मीटर थ्रो का लक्ष्य बनाकर गए थे सचिन
वल्र्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप के लिए सचिन यादव 87 मीटर थ्रो का लक्ष्य बनाकर गए थे। वह अपने लक्ष्य तक पहुंचने में कामयाब हो जाते तो शायद वह दिल ही नहीं बल्कि देश के लिए पदक भी जीत जाते। सचिन से अब देशवासियों की उम्मीद बढ़ती जा रही है।
पिता बोले बेटा देश के लिए जीतता रहेगा पदक
सचिन के पिता नरेश कहते हैं कि उनके बेटे ने देश के लिए पदक जीतने के लिए खूब मेहनत की। वह पता नहीं कैसे पदक नहीं जीत सका मगर उनको उम्मीद है कि वह जिस तरह से अभी तक पदक जीत रहा था उस तरह ही आगे भी पदक जीतेगा। बस लोगों का प्यार उसे मिलता रहे।