फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Baghpat News: जिंदगी जीने का अहसास कराता है रोजा

विज्ञापन
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

अग्रवाल मंडी टटीरी। रोजा अल्लाह की मुकम्मल इबादत है। रोजे का मतलब सिर्फ भूखे और प्यासे रहना ही नहीं, बल्कि वासना को दर किनार कर अल्लाह की इबादत में खो जाना है। रोजा जिस्मानी और रुहानी दोनों तरह की बातों का जरिया है।
विज्ञापन

मौलाना हाजी जहीर अहमद ने कहा कि रोजा ऐसी इबादत है, जिसका दिखावा नहीं किया जाता है। रोजा जुबान से बुरी बात करने, हाथों को गलत काम करने से रोकना है। रोजा जिंदगी जीने का भी एहसास कराता है। रमजान माह का तीसरा आसरा आग से खलासी का चल रहा है। इसमें सबको रोजे रखकर अपनी आग से खलासी कर लेनी चाहिए। अल्लाह सच्चे रोजेदार की दुआ जरूर कबूल करते हैं। अल्लाह रोजेदारों की बुराइयों को नेकी में बदल देते हैं और तौबा करने वालों के गुनाह माफ करते हैं। उन्होंने कहा कि रमजान मुबारक माह में पांच वक्त की नमाज पढ़ना चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें