महाचंडी महायज्ञ के दूसरे दिन गणेश पूजन, मंचदेव पूजन, देवी पूजन एवं व्यास पूजन हुआ
श्री त्रयम्बकेश्वर महाराज ने कहा, पुत्र वहीं जो पिता की प्रतिष्ठा को कम ना होने दें
संवाद न्यूज एजेंसी
अमीनगर सराय। कस्बे में चल रहे महाचंडी महायज्ञ के दूसरे दिन त्रयंबकेश्वर महाराज के सानिध्य में आचार्य दिवाकर वशिष्ठ ने यजमानों से विधिविधान से गणेश पूजन, मंचदेव पूजन, देवी पूजन एवं व्यास पूजन कराया। गणेश पूजन कराने के बाद यज्ञशाला में यज्ञ में आहुति दी। भगवती के दिव्य स्वरूप का वर्णन किया।
श्री त्रयम्बकेश्वर महाराज ने श्रीमद्देवी महापुराण कथा में भगवती के दिव्य स्वरूप का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि लड़का तो किसी भी प्राणी मात्र को हो सकता है। मगर, पुत्र वहीं जो पिता की प्रतिष्ठा को कम ना होने दें बल्कि उसे और ऊंचा उठाए। 100 कुंडीय महायज्ञ की परिक्रमा करने का फल मां गंगा में स्नान करने के बराबर है। अपने पापों को मुक्त करने के लिए शक्ति उपासना व यज्ञ परिक्रमा का अलौकिक महत्व है। उन्होंने श्रद्धालुओं बताया कि इस आयोजन से क्षेत्र में सुख शांति एवं खुशहाली होगी। उन्होंने कहा कि ईश्वर का स्मरण करने वाला जीव ताप और संताप से मुक्त होकर सुखमय जीवन व्यतीत करता है।
काशी आरती को देख मंत्रमुग्ध हुए श्रद्धालु
नौ दिवसीय सौ कुंडीय महाचंडी महायज्ञ और श्रीमद्देवी भागवत कथा से संपूर्ण कस्बा माता के जयकारों से गुंजायमान है। रात्रि में हुई काशी आरती की ज्योति के दर्शन के लिए भक्तों की सबसे ज्यादा भीड़ होती है।
परिक्रमा कर कमा रहे पुण्य
यज्ञशाला के चारों ओर श्रद्धालु परिक्रमा कर धर्म लाभ कमा रहे है। कोई 108 तो कोई इससे अधिक परिक्रमा कर भगवान की आराधना में लगा है। कस्बे से ही नहीं बल्कि आस पास के गांवों से श्रद्धालु परिक्रमा कर धर्मलाभ उठा रहे है। आचार्य श्री गुनप्रकाश ने बताया की मात्र परिक्रमा करने से भगवती के नवरात्रों का असीम फल प्राप्त होता है।