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पहले खुद सीखा , फिर विद्यार्थियों को पढ़ाया

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शिक्षा का अभियान
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ऑनलाइन शिक्षण शुरू होने पर शिक्षकों को उठानी पड़ी काफी परेशानी
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। कोरोना काल में स्कूल कालेज बंद होने से चलाई गई ऑनलाइन पढ़ाई शुरू कराने में शिक्षकों को भी परेशानी हुई। पहली बार एप और व्हाटसअप ग्रुप तैयार करने और फिर बच्चों को पढ़ाना शिक्षकों के लिए आसान नहीं रहा। इसके अलावा बच्चों पर स्मार्ट फोन का अभाव और नेटवर्किंग की समस्या के कारण भी शिक्षकों को बच्चों को पढ़ाने में परेशानी हुई।
कोरोना संक्रमण बढ़ने पर स्कूल कालेज बंद हो गए। शासन के निर्देश पर स्कूलों में दो साल तक बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई कराई गई। ऑनलाइन पढ़ाई कराने के लिए शिक्षकों को पहले खुद तैयार होना पड़ा। शासन के एप और व्हाटसअप ग्रुप बनाकर विद्यार्थियों को कक्षाओं से जोड़ने के लिए शिक्षकों को काफी मशक्त करनी पड़ी। स्मार्ट फोन और नेटवर्क की धीमी गति भी शिक्षकों को विद्यार्थियों को परेशानी उठानी पड़ी।
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पहले खुद को किया तैयार विद्यार्थियों को ऑनलाइन कक्षा कराने से पहले अपने स्तर पर तैयारी की गई। पहले खुद एप चलाना सीखा फिर छात्रों को पढ़ाया गया। शुरू-शुरू में परेशानी हो गई, मगर बाद में रूटीन बन गया। - डॉ प्रीति शर्मा, प्रधानाचार्या जीजीआई सी बागपत
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आसान नहीं था ऑनलाइन शिक्षा से जोड़ना
कालेज बंद होने पर बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो इसके लिए ऑनलाइन शिक्षण कराया गया। छात्रों को ऑनलाइन शिक्षण कराने के लिए पहले अपने स्तर पर तैयारी की गई, उसके बाद छात्रों को पढ़ाया गया। - राजबीर सिंह, प्रधानाचार्या इंटरमीडिएट कालेज सरूरपुर खेड़की
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पहले खुद सीखा एप चलाना
ऑनलाइन पढ़ाई के लिए विभाग की ओर से प्रेरणा एप, रीड अलांग एप, व्हाटसअप क्लास, और विडियो के माध्यम से पढ़ाई कराई गई। शुरू में पहले अपने पर एप चलाना, विडियो बनाना सीखा उसके बाद छात्रों को पढ़ाया। - पवन किशोर, सहायक अध्यापक उच्च प्राथमिक विद्यालय अग्रवाल मंडी टटीरी
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स्मार्ट फोन और नेटवर्क भी बना बाधा
ऑनलाइन पढ़ाई कराने में स्मार्ट फोन के साथ-साथ नेटवर्क भी बाधा बना। शुरू में वीडियो बनाना और फिर बच्चों को वीडियो के माध्यम से पढ़ाना आसान नहीं था। - कुमार तोमर, सहायक अध्यापक उच्च प्राथमिक विद्यालय सूरजपुर मेहनवा
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