-ऋषभदेव सभागार में आयोजित धर्मसभा में बोले आचार्य विशुद्ध सागर महाराज
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बड़ौत। आचार्य विशुद्ध सागर महाराज ने कहा कि नर तन, उत्तम बुद्धि, स्वस्थ जीवन, आत्म कल्याण की भावना, उच्च कुल वैराग्य-भावना, गुरु सन्निधि आत्म रुचि, खुव्रतों का धारण उत्तरोत्तर अत्यंत कठिन है। सुर दुर्लभ कोई पर्याय है तो वह 'मनुष्य पर्याय' है। मुक्त होने की अन्तिम पर्याय मनुष्य भव है।
जैनमुनि रविवार को ऋषभदेव सभागार में आयोजित धर्मसभा में बोल रहे थे। इस दौरान दीपावली महाेत्सव व भगवान महावीर का निर्वाण महोत्सव भी मनाया गया। धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए आचार्य ने कहा कि आभूषण धारण करना श्रेष्ठ नहीं है, ये आभूषण तो यहीं छूट जाएंगे। अच्छे-गुणों से स्वयं को संस्कारित करना चाहिए। अनुशासन, सत्य वादिता, अतिथिसेवा, प्रभु दर्शन, साधु-संगति, वात्सल्य संतोष विनय उत्तम कुल की पहचान है। कुलीन-मानव अप्रिय, कटुक-बचतों का उच्चारण नहीं करते हैं। कहा कि मर्यादा सीखो, मर्यादित जीवन जीना सीखो। मर्यादित जीवन धर्म, संस्कृति एवं मानव जाति के लिए वरदान है। सभा का संचालन डॉ़ श्रेयांस जैन ने किया। आचार्य संघ के सानिध्य में चातुर्मास निष्ठापन के अवसर पर चातुर्मास कलश बड़ौत दिगंबर जैन समाज समिति के अध्यक्ष प्रवीण जैन और मुख्य चातुर्मास संयोजक सुनील जैन ने प्रथम कलश अतुल जैन सर्राफ, द्वितीय कलश धनपाल जैन, तृतीय कलश सुनील जैन, अन्य कलश धन कुमार जैन सराफ, राजीव जैन, डॉ़ अनिल जैन, मनोज जैन पेट्रोल पंप वालों को दिए गए।