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रटौल से गाजियाबाद, मेरठ और दिल्ली के लिए नहीं बस सेवा, यात्री परेशान

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चांदीनगर। रटौल से गाजियाबाद, मेरठ और दिल्ली का सफर क्षेत्र के कई गांवों के लोगों के लिए परेशानी भरा है। वे डग्गामार वाहनों में सफर करने के लिए मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कई साल पहले मार्गों पर निजी बसों का संचालन होता था, लेकिन तीन साल से बस सेवा बंद है। ग्रामीण कई बार बसों का संचालन कराने की मांग कर चुके हैं, मगर समस्या का समाधान नहीं हो पाया है।
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ग्रामीणों का कहना है कि मार्ग पर बसों का संचालन बंद होने से लोगों को डग्गामार वाहनों में सफर करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। कई बार उच्च अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों से मार्ग पर बसों का संचालन कराने की मांग की जा चुकी है, मगर समस्या का समाधान नहीं हो पाया है। सबसे अधिक परेशानी नौकरीपेशा और दूसरे जिलों में पढ़ाई करने वाले छात्र-छात्राओं को है।
इन गांव के लोगों को उठानी पड़ रही परेशानी
बसों का संचालन बंद होने से रटौल, बंथला, विनयपुर, भेड़ापुर, फुलेरा, सिंगोली तगा, भगौट, पूरनपुर नवादा, गढ़ी कलंजरी, सिरोली, चिरौड़ी, निठोरा, मेवला, खैला, खासपुर, पांची, ढिकौली के ग्रामीणों को डग्गामार वाहनों से सफर करना पड़ता है।
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जोखिम भरा है डग्गामार वाहनों का सफर
डग्गामार वाहनों का सफर जोखिम भरा है। डग्गामार वाहन चालक मानक से अधिक सवारी लेकर चलते हैं। बस न चलने से लोगों को डग्गामार वाहनों की छत और खिडक़ी पर लटकर सफर करने के लिए मजबूर होना पड़ता है, जिससे हादसा होने का खतरा बना रहता है। - मिंटू चौधरी, भैड़ापुर
जेब पर भारी पड़ रहा सफर
बस बंद होने से लोगों के लिए दिल्ली, मेरठ और गाजियाबाद का सफर करने के लिए जेब ढीली करनी पड़ रही है तथा समय भी अधिक लग रहा है। लोगों की समस्या का समाधान करने के लिए मार्ग पर बस का जल्द संचालन होना चाहिए। - सतेंद्र सूद , फुलेरा
दस साल से बंद है बस सेवा
लगभग दस साल पहले रटौल बस स्टैंड से गाजियाबाद, दिल्ली के लिए रोडवेज व डीटीसी बस चलती थीं। बस सर्विस बंद होने के बाद लोगों डग्गामार वाहनों से सफर करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।-काशी प्रधान, भगौट
छात्रों को कॉलेज पहुंचने में हो रही परेशानी
क्षेत्र के लोगों के साथ-साथ दिल्ली, गाजियाबाद और मेरठ में पढ़ाई करने वाले छात्रों को कॉलेज पहुंचने में परेशानी हो रही है। छात्र-छात्राएं कॉलेज पहुंचने के लिए डग्गामार वाहनों का सहारा लेना पड़ रहा है। - देवेंद्र अरोड़ा, रटौल
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