कुर्डी टीले पर खोदाई करते मजदूर। स्रोत ग्रामीण
बड़ौत। कुर्डी टीले पर बुधवार को उत्खनन किया गया। यहां पर बनाए गए कुछ ट्रेंचों में ही पुरातत्वविदों को पुरावशेष मिले हैं। उम्मीद है कि जल्द ही नए ट्रेंच बनाकर खोदाई की जाएगी।
कुर्डी के टीले पर भारतीय विरासत संस्थान द्वारा जनवरी माह से उत्खनन किया जा रहा है। टीम ने शुरूआती दौर में निरीक्षण के दौरान संभावना जताई थी कि टीला पुरावशेषों की दृष्टि से बेहद खास है। खोदाई शुरू होते ही ट्रेंच से पुरावशेष मिलने लगे, मगर अभी तक कुछ ही ट्रेंचों से पुरावशेष मिले हैं। बाकी से कुछ नहीं मिल पाया है।
पुरावशेषों की तलाश में ही ट्रेंचों में करीब पांच फीट गहराई तक खोदाई की गई। इसके बाद भी पुरातत्वविदों के हाथ खाली रहे। ऐसा नहीं है कि टीले पर एक ही तरफ ट्रेंच बनाए गए है। टीले की चारों दिशाओं में तीन-तीन ट्रेंच बनाकर कुल 12 ट्रेंचों में खोदाई का काम किया जा रहा है। यहां पर बुधवार को भी उत्खनन किया गया। उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही नए ट्रेंच बनाकर खोदाई की जाएगी। ताकि कुछ अहम पुरावशेष पुरातत्वविदों को मिल सके।
खोदाई के चलते एक माह से ज्यादा का समय हो गया है। मगर, अभी तक पुरातत्वविदों व शोधार्थियों ने उम्मीद नहीं छोड़ी। उधर, तिलवाड़ा के आला टीले पर करीब तीन माह से खोदाई का काम चल रहा है। यहां पर चबूतरानुमा आकृति, सुराहीनुमा मिट्टी के बर्तनों के अलावा कुछ खास पुरावशेष अभी तक नहीं मिल पाए हैं।