बड़ौत। राजेंद्र मुनि महाराज ने कहा कि आत्मा का बोध प्राप्त करने के लिए आत्मा का कल्याण करने के लिए, आत्म शांति के लिए आरंभ और परिग्रह का त्याग नितांत आवश्यक है।
वह शनिवार को जैन स्थानक नया बाजार में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि जिस श्रावक-श्राविका में आरंभ और परिग्रह के त्याग की योग्यता आ जाती है, उसे निम्नलिखित लाभ की प्राप्ति होती है। वह प्रभु वाणी सुनने का पात्र बन जाता है। बोधी की प्राप्ति होती है धर्म में स्थिर हो जाता है, एक धनिक ईसा मसीह के पास आया और उनसे प्रश्न किया कि मुझे स्वर्ग का साम्राज्य कैसे मिले। इस पर ईसा मसीह ने उत्तर दिया की पहले तुम्हारे पास जितना रुपया पैसा है, सोना, चांदी है, बहुमूल्य आभूषण है, उन सबको एकत्रित कर कपड़े में गठरी बांधकर समुद्र में डाल आओ फिर तुम्हें मन चाहे साम्राज्य की प्राप्ति होगी। सभा में बहुत अधिक संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने प्रवचन का लाभ लिया। आयोजक श्री श्वेतांबर स्थानकवासी जैन सोसायटी शहर बड़ौत रहा।