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शिक्षा समाज की रीढ़ होती है और साहित्य समाज का दर्पण होता

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बड़ौत। जनता वैदिक कॉलेज में हिंदी विभाग ने दो दिवसीय वेब संगोष्ठी का आयोजन किया। इसमें वक्ताओं ने कहा शिक्षा समाज की रीढ़ होती है और साहित्य समाज का दर्पण होता है।
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संगोष्ठी का शुभारंभ डॉ. प्रणव शर्मा शास्त्री ने किया। संगोष्ठी की अध्यक्षता प्राचार्य डॉ. अलका रानी ने की। इस संगोष्ठी के संरक्षक प्रोफेसर राजीव कुमार गुप्ता ने कहा कि इस प्रकार की संगोष्ठियों के माध्यम से बौद्धिक विकास के साथ साथ एक नवीन चिंतन की राह निकलती है। प्रो. दिविक रमेश ने कहा कि शिक्षा समाज की रीढ़ होती है और साहित्य समाज का दर्पण होता है। प्रो. सूर्य प्रसाद दीक्षित और प्रो. पवन अग्रवाल ने कहा कि कोरोना संक्रमण संपूर्ण मानवता के लिए संकट बना हुआ है। प्रो. निलिमप त्रिपाठी ने वैदिक सभ्यता और संस्कृति को आज की विषम परिस्थितियों के लिए अनुकूल बताया। प्रो. उमापति दीक्षित ने कहा कि पूर्व में भी जब जब कोई आपदा आयी है तब साहित्यकारों ने उस विषय पर अपने लेखनी जरूर चलाई है। डॉ. मुन्ना तिवारी ने बताया कि विषम परिस्थितियों में ही हमारे धैर्य की परीक्षा होती है। इसके अलावा डॉ. बलजीत श्रीवास्तव, डॉ. शंकर मंडल, डॉ. शिव कुमार शर्मा, राजीव राणा ने भी विचार रखे। इसमें अरुण कुमार चतुर्वेदी, डॉ. नीलम राणा, अमित पांडेय ने भी जूम यू ट्यूब एवं फेसबुक लाइव में भाग लिया। संगोष्ठी का संचालन डॉ. गीता रानी ने किया।
फेफडे़ ठीक से काम नहीं करते तो बीमारी के लक्षण - डॉ. कुमार
बड़ौत। फिजियोथैरेपी वेलफेयर एसोसिएशन के तत्वावधान में वेबीनार सेमिनार का आयोजन किया। इसकी अध्यक्षता प्रदेश अध्यक्ष डॉ. एस पी राठी ने की। संचालन डॉ. संजीव आर्य ने किया। वेबीनार में मुख्य वक्ता डॉ. कुमार प्रीतम ने कहा कि कोरोना वायरस रोगियों के इलाज में मददगार चेस्ट फिजियोथैरेपी कोरोना संक्रमित के कई लक्षणों में सांस लेने में परेशानी भी एक प्रमुख लक्षण माना गया है। इसका सीधा संबंध फेफड़ों से है। कोरोना के अलावा फेफड़ों के ऐसे कई रोग हैं, जिन्हें खतरनाक समझा जाता है। जब फेफडे़ ठीक से काम नहीं करते या इससे जुड़ी गंभीर बीमारी हो तो डॉक्टर कुछ थेरेपी करवाते हैं। ये इलाज में कारगर होती हैं। चिकित्सक की भाषा में इसी को चेस्ट फिजियोथैरेपी कहा जाता है। इसी को सीपीटी या चेस्ट पीटी भी कहते हैं। इसमें डॉ. संजीव आर्य, डॉ. ओमपाल धनकड़, डॉ. वीणा कठपाल, डॉ. विभोर शर्मा, डॉ. जावेद अली, डॉ. नीरज कुमार, डॉ. सुशील कुमार आदि रहे।
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