बड़ौत। क्षेत्र के असारा, बड़ौत, बडौली, बावली, मलकपुर, बिजरौल, असारा आदि गांवों के सामाजिक कार्यकर्ता बुधवार को तहसील पहुंचे और पीएम को संबोधित ज्ञापन तहसीलदार को सौंपकर पश्चिमी उप्र को अलग राज्य बनाने की मांग की।
ज्ञापन सौंपते हुए उन्होंने बताया कि आबादी तथा क्षेत्रफल के हिसाब से उत्तर प्रदेश बड़ा राज्य है। इसकी आबादी 25 करोड़ से ज्यादा जनसंख्या के साथ दुनिया के पांचवें सबसे बड़े देश के समकक्ष है। इसमें 75 जिले 822 ब्लॉक और 52000 ग्राम पंचायत है। प्रदेश की राजधानी लखनऊ है जो पश्चिम उत्तर प्रदेश के कई जिलों से 700 किमी तक की दूरी पर है। प्रदेश के सभी विभागों के मुख्यालय लखनऊ, कानपुर व इलाहाबाद में है, इसके चलते पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोगों को बहुत परेशानी का सामना करना पड़ता है।
प्रदेश का उच्च न्यायालय इलाहाबाद भी पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों से 850 किमी तक की दूरी पर है। यहां के नागरिकों को मुकदमों की पैरवी के लिए हाईकोर्ट पहुंचने में धन एवं समय अधिक खर्च करना पड़ता है। उप्र में 30 स्टेट यूनिवर्सिटी हैं, इसमें से पश्चिमी उप्र की आठ करोड़ जनता के लिए मात्र छह ही हैं। सेंट्रल यूनिवर्सिटी भी पांच में से सिर्फ एक ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश में है। उत्तर प्रदेश के 30 मेडिकल कॉलेजों में से सिर्फ पांच ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश में है। इसमें इफ्तख़ार मलिक, इमरान, रोहित तोमर, डॉ. इल्यास, उस्मान तीरगर आदि मौजूद रहे।