किदवई नगर के इमरान की हत्या सुपारी के ढाई लाख रुपये नहीं देने पर शूटरों ने की थी। इसका खुलासा पुलिस ने तीन हत्यारोपियों को गिरफ्तार कर किया। पुलिस ने हत्यारोपियों से घटना में प्रयुक्त कार, तमंचा, कारतूस, रस्सी और मृतक का पर्स समेत अन्य सामान बरामद कर लिया।
बड़ौत की छपरौली चुंगी पर किदवई नगर में रहने वाले इमरान की 16 अक्तूबर को शामली जिले के गढ़ीपुख्ता में गला घोंटकर हत्या कर दी गई थी। उसका शव सड़क किनारे खेत में पड़ा मिला था। मृतक इमरान के परिजनों ने कोतवाली में तहरीर देकर गुमशुदगी दर्ज कराई थी। जांच में जुटी पुलिस ने औसिक्का के समीप घेराबंदी कर रिहान, दिलदार और शाकिब निवासी बुढेड़ा को गिरफ्तार कर लिया, जिन्होंने इमरान की हत्या करने की जानकारी दी।
सीओ बड़ौत विजय चौधरी ने बताया कि गिरफ्तार किए गए हत्यारोपियों ने पूछताछ में बताया कि मृतक इमरान लोनी की रहने वाली अपनी प्रेमिका के पति की हत्या कराना चाहता था। इसके लिए इमरान ने उन्हें ढाई लाख रुपये में सुपारी दी थी। 16 अक्तूबर को कार लेकर इमरान के साथ हत्या करने शामली गए थे। वहां उन्होंने सुपारी के रुपये मांगे तो इमरान वापस बड़ौत जाकर देने की बात कहने लगा। इसी बात पर उनके बीच झगड़ा हो गया। हाथापाई में गोली चल गई, जो शाकिब के हाथ में लग गई। इसके बाद उन्होंने रस्सी से गला दबाकर इमरान की हत्या कर दी और शव फेंककर भाग गए। हत्या में शामिल चौथे आरोपी कार चालक शाहरुख की तलाश में दबिश दी जा रही है।
हमें लगा, हत्या के बाद रुपये नहीं देगा इमरान
आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि शामली में हत्या करने के लिए तमंचे, कारतूस से लेकर अन्य हथियार भी लेकर गए थे। हत्या की घटना के बाद पुलिस पीछे लग जाती। इमरान ने जब बड़ौत जाकर रुपये देने की बात कही तो उन्हें लगा कि हत्या के बाद इमरान रुपये नहीं देगा। इसको लेकर गाली-गलौज हो गई थी।
इमरान की चार बेटियां, छह महीने पहले पत्नी दिया बेटे को जन्म
इमरान के परिवार में चार बेटियां और एक छह माह का बेटा रह गया है। मृतक के परिजनों ने बताया कि इमरान राजमिस्त्री का काम करता था, उसकी पत्नी ने छह माह पहले ही बेटे को जन्म दिया था।
निजी चिकित्सक से कराया था शाकिब का उपचार
सुपारी लेकर हत्या करने गए शूटरों और इमरान के बीच हुए झगड़े में गोली लगने के बाद घायल शाकिब को लेकर हत्यारे घूमते रहे। अपने एक जानकार से संपर्क कर शामली जिले में ही घायल शाकिब का उपचार कराया। इसके बाद शहर के एक चिकित्सक से उपचार करा रहे थे। इसके बाद चुपचाप गांव पहुंचकर रहने लगे।