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लाक्षागृह या कब्रिस्तान: अदालत के फैसले का इंतजार, सुनवाई के लिए तय हुई ये तारीख, 53 साल से चल रहा है मामला

Tue, 12 Sep 2023 08:26 PM IST
कपिल kapil संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत

सार

Baghpat News : 53 साल से चले आ रहे मामले में अब सिर्फ अदालत के फैसले का इंतजार है। फैसले के बाद ही तय होगा कि बरनावा में लाक्षागृह है या कब्रिस्तान।
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बरनावा लाक्षागृह - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बरनावा में लाक्षागृह या कब्रिस्तान, इसको लेकर फैसले का इंतजार बढ़ गया है। वहां प्राचीन टीले को लेकर 53 साल से चल रहे वाद में मंगलवार को फैसला नहीं आ सका। जिसमें अब सुनवाई के लिए 22 सितंबर की तारीख लगी है। उस दिन सभी पक्षकारों को न्यायालय में मौजूद रहना होगा।

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बागपत जनपद के बरनावा के रहने वाले मुकीम खान ने वर्ष 1970 में मेरठ की अदालत में वाद दायर किया था। जिसमें उन्होंने लाक्षागृह गुरुकुल के संस्थापक ब्रह्मचारी कृष्णदत्त महाराज को प्रतिवादी बनाया गया था। इसके बाद मुकीम खान और कृष्णदत्त महाराज दोनों का निधन हो गया। लेकिन अब दोनों पक्ष से अन्य लोग पैरवी कर रहे हैं।

अब यह मामला बागपत में सिविल जज जूनियर डिवीजन प्रथम की कोर्ट में चल रहा है। जिसमें एक पक्ष से अय्यूब, मुन्ना समेत अन्य और दूसरे पक्ष से गांधी धाम समिति के प्रबंधक राजपाल त्यागी वकीलों के माध्यम से कोर्ट में अपने-अपने साक्ष्य प्रस्तुत कर चुके हैं। जिससे केस अब फैसले पर चल रहा है। इसमें मंगलवार की तारीख लगी थी, लेकिन अब इसमें 22 सितंबर को सुनवाई की तारीख लग गई है।

यह किया हुआ है दावा
इसमें मुकीम खान की तरफ से वाद दायर करते हुए दावा किया गया था कि बरनावा में प्राचीन टीले पर शेख बदरूद्दीन की दरगाह और कब्रिस्तान है। वह सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड में दर्ज होने के साथ ही रजिस्टर्ड है। इस पक्ष के वकील शाहिद अली का कहना है कि उनकी तरफ से सभी साक्ष्य कोर्ट में दिए हुए है।

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प्रतिवादी पक्ष का यह तर्क
गांधी धाम समिति के वकील रणवीर सिंह तोमर के अनुसार यह ऐतिहासिक टीला महाभारत कालीन लाक्षाग्रह है। यहां सुरंग व अन्य अवशेष इसका प्रमाण है। हमारी तरफ से सभी साक्ष्य कोर्ट में दिए हुए है। वर्ष 1920 में रिकॉर्ड में दर्ज जितनी भी देश व प्रदेश की संपत्ति ऐतिहासिक थी और वहां क्या था, वह सबकुछ कोर्ट में दिया हुआ है।

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