बागपत। सरूरपुर कलां गांव स्थित श्री नेमिनाथ दिगंबर जैन इंटर मंदिर में भक्तामर विधान के सातवें दिन भूगर्भ से प्रकटित हुए भगवान पार्श्वनाथ भगवान की पूजा अर्चना की गई। विधान मंडलों पर 48 अर्ध्य अर्पित किए।
श्री नेमिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में 48 दिवसीय भक्तामर विधान का आयोजन चल रहा है। सातवें दिन भगवान पार्श्वनाथ की पूजा अर्चना की गई। श्रद्धालुओं ने भजनों के माध्यम से विधान की पूजा और आरती का आयोजन किया गया। नमन जैन ने सभी श्रद्धालुओं को भक्तामर की महिमा व श्रावक के अष्टमूलगुण के बारे में जानकारी दी। कहा कि जैन धर्म में श्रावक के आठ मूलगुणों के अंतर्गत मद्यत्याग, मांस त्याग, मधु (शहद) त्याग और पांच उदम्बर फलों (बड़, पीपल, गूलर, कठूमर, पाकर) का त्याग करना चाहिए। विधान रिमा जैन ने आयोजित किया। लक्ष्य, वैशाली, पूर्ती, वंश, अरिहंत, सिम्मी शालू गीता, संतोष, मंजू, अनिता, सपना, जूली, ऊषा, हंसकुमार जैन का सहयोग रहा।