- जिले के 62 ग्राम सचिवों में केवल तीन कर रहे कार्य, अन्य 59 धरना देकर बैठे
- सीडीओ के सितंबर से अभी तक का वेतन नहीं जारी करने के निर्देश, अब बात भी बंद होगी
- ग्राम सचिवों का गुस्सा भी भड़का, मांगों को पूरा नहीं करने पर आंदोलन जारी रखा जाएगा
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। ग्राम सचिवों पर प्रशासन ने पूरी तरह से शिकंजा कसना शुरू कर दिया है और 59 ग्राम सचिवों के वेतन को रोक दिया गया है। जिले में 62 ग्राम सचिव है और उनमें से केवल तीन ही काम कर रहे है, जबकि अन्य धरना देकर बैठे हुए है। इसलिए ही उनका सितंबर से अभी तक का वेतन रोक दिया गया है। इसके अलावा सीडीओ ने अब ग्राम सचिवों से कोई वार्ता नहीं करने की बात कही है। इसका पता चलने पर ग्राम सचिवों का गुस्सा भी भड़क गया है और अपनी मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रखेंगे।
डीपीआरओ के साथ विवाद होने पर ग्राम सचिवों ने 31 अगस्त से कार्य बहिष्कार करके विकास भवन पर धरना शुरू कर दिया था। यह धरना 16 सितंबर को खत्म जरूर हुआ, लेकिन ग्राम सचिवों व डीपीआरओ का विवाद लगातार जारी रहा। इससे ग्राम सचिवों ने 28 सितंबर से दोबारा कार्य बहिष्कार करके धरना शुरू कर दिया था। ग्राम सचिवों व सीडीओ के बीच विवाद सुलझाने के लिए वार्ता भी हुई, लेकिन ग्राम सचिवों ने सस्पेंड किए गए तीनों सचिव को बहाल करने के बाद ही धरना खत्म करने की शर्त रख दी। इसको लेकर मामला बिगड़ गया।
अब प्रशासन ने ग्राम सचिवों पर कड़ा शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। सीडीओ रणजीत सिंह ने जिले के 62 ग्राम सचिवों में 59 को वेतन नहीं देने का आदेश जारी कर दिया है। सीडीओ ने अब साफ कर दिया है कि ग्राम सचिवों से वह कोई वार्ता भी नहीं करेंगे। इसका कारण यह है कि जिन तीन ग्राम सचिवों को सस्पेंड किया गया है, उनमें से एक ने करोड़ों रुपये का घपला किया हुआ है। करोड़ों रुपये का भ्रष्टाचार करने वाले ग्राम सचिव को प्रशासन बहाल नहीं करना चाहता है, जबकि अन्य को बहाल करने में प्रशासन को कोई आपत्ति नहीं है।
धरने में शामिल नहीं होने वाले सचिवों का बहिष्कार होगा
ग्राम विकास अधिकारी व ग्राम पंचायत अधिकारी समन्वय समिति के बैनर तले चल रहे सचिवों के धरने में कहा कि अगर कोई सचिव धरने पर उपस्थित नहीं होता है तो उनका बहिष्कार किया जाएगा। क्योंकि ऐसे सचिव संगठन के साथ नहीं रह सकते है और अगर भविष्य में उनके साथ कुछ होता है तो उनका सहयोग नहीं किया जाएगा।
ग्राम सचिवों ने कार्य ही नहीं किया है तो उनको वेतन किस बात का दिया जाएगा। इसलिए उनका सितंबर से अभी तक का वेतन नहीं दिया जाएगा और जब तक उनका धरना रहेगा, वेतन काटा जाएगा। अब उनसे कोई बातचीत भी नहीं होगी। - रणजीत सिंह, सीडीओ।
प्रशासन पूरी तानाशाही दिखा रहा है। लेकिन यहां उनकी तानाशाही नहीं चलने दी जाएगी। अधिकारी वेतन भी रोक रहे है और वह बात करके समस्या का समाधान भी करने को तैयार नहीं है। इसलिए धरना लगातार जारी रहेगा। - प्रमोद कुमार, अध्यक्ष संयुक्त समिति।