अंतरराष्ट्रीय भ्रष्टाचार दिवस
80 फीसदी शिकायतें जांच के नाम पर अटकी रहती हैं अधिकारियों की फाइलों में
15 दिनों के अंदर समाधान के दावे भी हवाई, पीड़ित काटते रहते है चक्कर
ग्राम पंचायत, पुलिस विभाग, आपूर्ति विभाग, बिजली, राजस्व और चकबंदी की शिकायतें अधिक
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। भले ही केन्द्र व प्रदेश सरकार भ्रष्टाचार को जड़ से मिटाने को लेकर एड़ी चोट तक दम लगा रही हो, लेकिन यह कम होने का नाम नहीं ले रहा है। बागपत जनपद में प्रति माह सरकारी विभागों में 850 से अधिक शिकायतें आती है, जिनमें से 40 फीसदी शिकायतें भ्रष्टाचार से जुड़ी होती है। हैरानी की बात यह है कि जो शिकायतें हर माह आ रही है, उनमें से 80 फीसदी शिकायतें जांच के नाम पर अधिकारियों की फाइलों में दबी पड़ी है। यह हालत तब है जब पुलिस प्रशासन से लेकर अन्य सरकारी विभागों के कामकाज ऑनलाइन कर दिए गए, ताकि लोगों को दलालों से बचाया जा सके। बावजूद इसके भ्रष्टाचार पर अंकुश नहीं लग रहा है।
शिकायतों के अटके पड़े समाधान
शिकायत के कई माध्यम खुले है। इनमें ऑनलाइन पोर्टल, तहसील दिवस, थाना दिवस, जन सुनवाई पोर्टल, जिला मुख्यालय, पुलिस मुख्यालय और विकास भवन में ही आनलाइन और मैनुअल शामिल है। हर महीने 850 से अधिक शिकायतें आ रही है। सरकारी योजनाओं में गोलमाल के अलावा सबसे अधिक शिकायतें आपूर्ति विभाग, पुलिस विभाग, ग्राम पंचायतों, बिजली, राजस्व और चकबंदी से जुड़ी है।
केस नंबर एक : गौरीपुर जवाहरनगर ग्राम पंचायत में लगभग 12 लाख रुपये के गबन के मामले में सीडीओ रंजीत सिंह ने ग्राम विकास अधिकारी को निलंबित कर दिया था। इसके अलावा इस वर्ष अक्टूबर माह में तत्कालीन डीपीआरओ बनवारी सिंह ने विकास कार्यों में लाखों रुपये की अनियमितता मिलने पर एक ग्राम सचिव को निलंबित कर दिया था।
केस नंबर दो : वर्ष 2021 के अक्टूबर माह में चोरों की सेटिंग कराने के व 70 हजार रुपये के लेनदेन के मामले में एसपी नीरज जादौन ने बड़ौत मंडी चौकी प्रभारी विपिन कुमार को निलंबित कर दिया था।
केस नंबर तीन : वर्ष 2019 के अक्टूबर माह में इब्राहिमपुर माजरा गांव मेें दो परिवारों के बीच जमीन को लेकर हुए विवाद में रमाला थाने पर तैनात एक दरोगा पर रिश्वत लेकर एक तरफा कार्रवाई करने का आरोप लगा था। तत्कालीन एसपी प्रताप गोपेन्द्र यादव ने दरोगा को लाइन हाजिर कर दिया था।
केस नंबर चार : वर्ष 2016 के जून माह में लुहारी गांव के राशन डीलर सुधीर दांगी की निलंबित दुकान को बहाल करने के नाम पर सप्लाई इंस्पेक्टर सुधीरपाल को दस हजार की रिश्वत मांगी थी। शिकायत पर मेरठ के भ्रष्टाचार निवारण संगठन की टीम ने तहसील में रंगेहाथ रिश्वत लेते पकड़ा था।
सरकारी विभागों में ऐसी शिकायतें अधिक
- आपूर्ति विभाग से जुड़ी, राशन कालाबाजारी, राशन वितरण न करना।
- पुलिस विभाग में चालान के नाम पर अवैध वसूली।
- विद्युत चेकिंग और मीटर में गड़बड़ी के नाम पर उपभोक्ताओं से वसूली।
- ग्राम पंचायतों में सड़क, नाली और भवन निर्माण में गोलमाल।
- प्रधानमंत्री आवास, किसान सम्मान निधि सहित अन्य योजनाओं में पात्रों का चयन न होना।
- शिक्षा विभाग में नियुक्ति, फर्नीचर और वर्दी के नाम पर गोलमाल।
- विधवा वृद्धावस्था पेंशन में अनियमितता की शिकायतें।
- बैंकों में ऋण वितरण में भ्रष्टाचार की भी शिकायतें आती रहती है।
अधिकांश शिकायतें सरकारी योजनाओं और ग्राम पंचायतों में भ्रष्टाचार से जुड़ी होती है। इनमें कुछ निजी रंजिश और कुछ राजनीतिक के कारणों से भी होती है। प्रशासनिक और पुलिस स्तर पर इनकी जांच की जाती है। जो भी दोषी होता है, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाती है। - सुभाष सिंह, एसडीएम।