फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नामांकन के सापेक्ष छात्र छात्राओं की संख्या कम

विज्ञापन
विज्ञापन
बागपत। शिक्षा पर हर महीने करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद प्राइमरी स्कूलों की स्थिति सुधरने का नाम नहीं ले रही है। नामांकन के सापेक्ष छात्र छात्राओं की संख्या कम है। वर्तमान समय में स्कूल खाली पड़े हैं। किसी का कहना है देहात में बगैर मान्यता के चल रहे स्कूलों की वजह से प्राइमरी स्कूलों तक बच्चे नहीं पहुंच रहे हैं तो किसी का कहना है कि सक्षम लोग महंगी फीस के बावजूद प्राइवेट स्कूलों में बच्चों को पढ़ा रहे हैं। लोगों का कहना है कि दसवीं तक की शिक्षा सरकारी स्कूलों में अनिवार्य होनी चाहिए।
विज्ञापन

पाली गांव में दिल्ली-सहारनपुर हाईवे स्थित प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूल हैं। प्राथमिक विद्यालय की प्रधानाध्यापक अनीता वर्मा ने बताया कि गेहूं की कटाई के कारण बच्चों की संख्या कम है। स्कूल में 186 छात्र-छात्राएं पंजीकृत है, लेकिन उपस्थित 79 ही चल रहे हैं। उच्च प्राथमिक विद्यालय का भी यह हाल रहा। यहां पर 79 विद्यार्थी पंजीकृत हैं, लेकिन पहुंचे केवल 30 ही स्कूल पहुंचे। प्रधानाध्यापक अनुपमा रानी का कहना है कि एक तो गेहूं की कटाई और ऊपर से क्षेत्र में लगातार खुलते जा रहे प्राइवेट और बगैर मान्यता वाले स्कूल इसकी बड़ी वजह है। सरकारी स्कूलों में शिक्षा अनिवार्य होनी चाहिए।

छात्रों की उपस्थिति के अनुसार दी जाएगी शिक्षकों को तैनाती
पाली गांव निवासी भोले का कहना है कि सरकारी स्कूल में पढ़ाई नहीं होती है, इस कारण अभिभावकों का सरकारी स्कूलों से मोहभंग हो रहा है। स्कूल में तैनात अधिकांश शिक्षक बातचीत करते है, पढ़ाई पर कोई ध्यान नहीं है। इसमें सुधार की जरूरत है।
विज्ञापन

वेदराम का कहना है कि सरकार ने सब कुछ फ्री किया हुआ है, इसके बाद भी शिक्षा में कोई सुधार नहीं हो पा रहा है। स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र छात्रों को दिए जाने वाले खाने की व्यवस्था बंद होनी चाहिए। इसमें भ्रष्टाचार किया जाता है। पढ़ाई पर किसी का ध्यान नहीं रहता है।
रकम सिंह ने कहा कि सरकारी स्कूलों में शिक्षण व्यवस्था चौपट हो चुकी है। सरकारी की तरफ से स्कूल में पढ़ने वाले छात्र छात्राओं के खाने पर ज्यादा और शिक्षा पर कम ध्यान रहता है। व्यवस्था में बदलाव की बेहद जरूरत है। परिषद की शिक्षा पर गहनता से ध्यान देने की जरूरत है।
मनोज चौहान ने कहा कि स्कूलों में छात्र छात्राएं तो कम है, लेकिन शिक्षकों की भरमार है। ऐसी व्यवस्था की जाए की जहां छात्र छात्राएं अच्छी पढ़ाई और नामांकन में बढ़ोतरी हो। फर्जी नामांकन न छात्रों की उपस्थिति के अनुसार शिक्षकों की तैनाती की जाए।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें