आजमगढ़। 22 वर्षों से कम्हेनपुर की अजीविका का साधन बनी आस्था की प्रतीक तुलसी की सुध अब सरकार ने भी ली है। प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना में जिले का चयन तुलसी उत्पादन के लिए किया गया है। अब तक जनपद में बड़े छोटे स्तर पर इसकी खेती की जाती थी। यहां से ब्रिटिश कंपनी तुलसी की खरीदती थी लेकिन अब सरकार किसानों को आर्थिक सहायता और विपणन में सहयोग देगी तो यह उत्पाद तेजी से बढ़ेगा।
तुलसी हर आंगन में लगाई जाती है। हिंदू आस्था से जुड़े यह पौधा औषधीय गुणों से भी भरपूर है। पंरपरागत खेती में लागत ज्यादा और मुनाफा कम होने कारण शहर से सटे कम्हेनपुर में लोगों ने तुलसी की खेती आर्गेनिक विधि से करनी शुरू की। वर्ष 1998 से यहां पर तुलसी की खेती हो रही है। तुलसी के विपणन की समस्या ज्यादा है। पर उत्पादन को देखते हुए ब्रिटिश कंपनी आर्गेनिक इंडिया ने यहां अपनी प्रोसेसिंग यूनिट लगा दी तो विपणन की समस्या से किसान मुक्त हो गए। मुनाफा होने लगा तो आसपास के एक दर्जन गांवों में भी इसकी खेती शुरू हो गई। हालांकि बाद में कुछ समस्या आने पर दूसरे गांवों के लोगों ने इसकी खेती छोड़ दी। मगर कम्हेनपुर और आसपास के गांवों में लगभग 100 हेक्टेयर क्षेत्रफल में इसकी खेती हो रही है।, जिससे 273 किसान जुड़े हैं।
आर्गेनिक इंडिया के डिप्टी मैनेजर नवीन सिंह ने बताया कि किसानों को हर साल 50 से 60 लाख रुपये का भुगतान किया जाता है। डस्ट, अर्क और डंठल से माला तैयार कर अमेरिका, जर्मनी, जापान, स्विट्जरलैंड भेजा जाता है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में इसके बेहतर दाम मिल जाते हैं। आजमगढ़ में जैविक विधि उत्पादित तुलसी का चाय के रूप में भी इस्तेमाल होता है और दवाएं भी बनती हैं।