सरायमीर में मजलिस को संबोधित करते हुए मौलाना वसी मोहम्मद खां।
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सरायमीर। इमाम हुसैन के 18 साल के बेटे हजरत अली अकबर की शहादत की याद में बृहस्पतिवार को नवीं मुहर्रम को निकलने वाला कदीम जुलूस स्थगित होने की वजह से सरायमीर इमामबाड़ा में मजलिस का आयोजन किया गया। जहां पर मौलाना ने कर्बला का वाकया बयान किया। नौहाख्वानों ने नौहा व मातम करके खिराजे-ए-अकीदत पेश किया।
मजलिस को संबोधित करते हुए मौलाना वसी मोहम्मद खां ने कहा कि कर्बला की जंग हक, सत्य व असत्य के बीच थी। नवासे रसूल हजरत इमाम हुसैन ने हर प्रकार का बलिदान दिया। प्राणों को न्यौछावर करना पड़ा। लेकिन सत्य व न्याय की रक्षा करके मानवता को बचा लिया। करबला के 72 शहीदों की कुर्बानी संपूर्ण मानव जगत के लिए है, इनकी कुर्बानी इस्लामी इतिहास का महत्वपूर्ण मोड़ है। जहां सत्य और असत्य का अंतर खुलकर सामने आ जाता है। मजलिस में कायम रजा, गुलशन रजा, अली अब्बास, तौहीद हुसैन, अगाज ने नौहाख्वानी किया।