आजमगढ़। मवेशियों को इलाज के लिए अब अस्पताल लेकर नहीं जाना पड़ेगा। घर पर ही उनको दवा मिलेगी। इसके लिए पशुपालन विभाग जिले में मोबाइल अस्पतालों का संचालन करेगा। इसके लिए नौ वाहनों की मांग की गई है। प्रत्येक वाहन में एक पशु चिकित्सक, फार्मासिस्ट, चालक के साथ चिकित्सा उपकरण व दवाएं उपलब्ध होंगी। जिससे वह घर पर जाकर पशुओं का उपचार कर सकेंगे।
पशुपालकों के लिए खुशखबरी है। अब उन्हें पशुओं का उपचार कराने के लिए इधर, उधर नहीं भटकना पड़ेगा। इससे लोगों को राहत मिलेगी। लखनऊ से नौ मोबाइल अस्पताल की मांग की गई है, जो गांव-गांव जाकर इलाज करेंगी। यही टीम टीकाकरण और जियो टैगिंग भी करेगी।
टीमें पशुपालकों के घर-घर जाएंगे। इसके साथ ही वह खुरपका-हंपका रोग, गलाघोंटू, गिल्टी रोग, लंगड़िया रोग समेत अन्य रोगों का उपचार करेंगे। इसके साथ ही पशु की ब्रीड, दुग्ध उत्पादन, टीकाकरण की स्थिति, कृत्रिम गर्भाधान व जियो टैगिंग व वैक्सीनेशन का कार्य भी करेगी। टीम जिले में रहकर हर काम करेगी।
जिले में पशुओं की संख्या पर एक नजर---
पशुओं के नाम - संख्या
गाय व भैंस - 938211
बकरी - 27543
सूअर - 9345
भेड़ - 27321
कुल पशुओं की जियो टैगिंग - 735695
जिले में लखनऊ से नौ टीम मोबाइल अस्पताल वाहन से आएंगी। उस वाहन में चिकित्सक, फार्मासिस्ट समेत अन्य स्टाफ होंगे। साथ ही चिकित्सकीय उपकरण व दवाएं होंगे। वह घर-घर जाकर पशुओं का उपचार करेंगे। साथ ही जियो टैगिंग समेत अन्य कार्य भी टीम करेगी।
डा. वीके सिंह, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, आजमगढ़।