अंगद यादव ने बताया कि यहां पुलिस होती तो नाव में असुरक्षा नहीं होती और ना लोग लापरवाही करते। नाव ओवरलोड होने के चलते पलट गई। गनीमत रही कि नदी किनारे कुछ लोग मौजूद थे, जिससे बड़ा हादसा होते-होते बच गया। सभी बच्चे अपने अपने घर वापस चले गए। यहां से प्रतिदिन नाव से सैकड़ों बच्चे महुला गढ़वल बांध के दक्षिण पढ़ने के लिए जाते हैं।
घाघरा नदी के जलस्तर में कमी दर्ज की गई है लेकिन इसके साथ ही कटान में तेजी आई है। दो दिन से बढ़ रहे जलस्तर में रविवार को कमी आई। दोनों गेजों पर नदी का जलस्तर खतरा बिंदु से नीचे है। गांगेपुर श्मशान घाट के पास कटान होने लगा है।
घाघरा का जलस्तर घटने के साथ ही नदी के तटवर्ती क्षेत्रों के गांवों के पास कटान हो रहा है। गांगेपुर और परसिया में कटान से किसान चिंतित हैं। कटान की चपेट में खेत और बाग बगीचे आ रहे हैं। कटान गांव के कई किसान भूमिहीन हो गए हैं। कुछ किसान भूमिहीन होने की कगार पर हैं। परसिया रिंग बंधा भी कटान की चपेट में है।
गांगेपुर के पास कुड़वा रिंग बंधा, गांगेपुर श्मशान घाट के पास कटान कर रही है। हालांकि पहले की अपेक्षा कटान अब कम हुई है। कटान को रोकने के लिए जो कार्य किया जा रहा था वह भी बंद चल रहा है। देवारा खास राजा के बगहवा का पूरा, झगरहवा, साधु का पूरा, बासु का पूरा के पास कृषि योग्य भूमि कटकर घाघरा में समाहित हो रही है।
देवारा क्षेत्र में जाने वाले संपर्क मार्गों से पानी हट गया है लेकिन कई संपर्क मार्ग कट गए हैं जिससे आवागमन बाधित हो रहा है । लोग दोपहिया, चार पहिया वाहन से नहीं जा पा रहे हैं। किसी की तबीयत खराब होने पर मरीजों को किसी तरह से अस्पताल पर पहुंचाया जा रहा है। सूचना देने पर स्वास्थ्य विभाग की 108 नंबर एंबुलेंस बंधे पर ही आकर रुक जा रही है।
शनिवार को डिघिया गेज पर घाघरा नदी का जलस्तर 70.36 मीटर दर्ज किया गया था जो रविवार को घटकर 70.24 मीटर हो गया। यहां पर नदी का खतरा बिंदू 70.40 मीटर है। वहीं बदरहुंआ गेज पर शनिवार को नदी का जलस्तर 71.34 मीटर दर्ज किया यगा था जो रविवार को घटकर 71.31 मीटर हो गया। यहां पर नदी का खतरा स्तर 71.68 मीटर है।