राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने स्टालों का निरीक्षण किया।
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आजमगढ़ में कृषि महाविद्यालय परिसर में मंगलवार को किसानों और कृषि वैज्ञानिकों से राज्यपाल आनंदी बेन पटेल रूबरू हुईं। उन्होंने कहा कि आबादी बढ़ गई, एक खेत के कई टुकड़े हो गए ऐसे में खेती का दायरा कम होने से छोटे किसानों के समक्ष समस्या खड़ी हो गई है। कृषि वैज्ञानिकों कम जगह में कई फसल पैदा करने के लिए प्रयास करना चाहिए।
यहां कागजों में सब कुछ ठीक है लेकिन जमीन पर कोई हकीकत नजर नहीं आती है। कृषि महाविद्यालय परिसर पहुंची राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने कृषि महाविद्यालय परिसर में लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इस दौरान वहां लगी प्रदर्शनी के बारे में पूछा कि यह कहां बनी है तो बताया गया कि इलाहाबाद में बनी है तो उन्होंने कहा कि यहां क्यों नहीं? इसका कोई जवाब वहां मौजूद लोगों के पास नहीं था।
इसके बाद वह प्रगतिशील किसानों से संवाद करने के लिए हाल में पहुंची। जहां प्रगतिशील किसानों और मेधावी छात्राओं को पुरस्कृत करते हुए कहा कि मैं भी किसान की बेटी हूं और मैंने भी खेती की है। मेरे पिताजी आज से 100 वर्ष पहले खेती में प्रयोग करते रहे। किसानों को अपनी आय बढ़ाने के लिए अपने खेतों में विविध प्रकार की खेती करनी चाहिए। जिससे कम भूमि में अधिक से अधिक पैदावार हो सके, इसका प्रयास करना चाहिए।
किसानों को और अधिक प्रशिक्षण देने की जरूरत है। कृषि वैज्ञानिकों को जमीन पर उतरकर हर गांव के प्रगतिशील किसान की 500 स्क्वायर मीटर जगह में खेती का प्रयोग कर कई फसलें पैदा करने की जरूरत है ताकि हर किसान इसे देखकर खेती कर सकें। इसकी शुरूआत यहां अध्ययनरत छात्रों से होनी चाहिए। यह छात्र अपने खेत में इस प्रकार की खेती को प्रयोग के तौर पर करें जिसे देखकर अन्य किसान भी ऐसा करने के लिए प्रेरित करें।