आजमगढ़। कप्तानगंज थाना क्षेत्र के पासीपुर गांव के पास शनिवार की दोपहर मुठभेड़ के दौरान गिरफ्तार हुए दोनों बदमाशों ने बताया कि वह जिस अरुण यादव की हत्या करने जा रहे थे। वह सूद पर लोगों को रुपये देता है। बदमाशों में से एक के घर वालों ने उससे 3.50 लाख रुपये उधार के बदले करीब दस लाख रुपये तक दे चुके हैं। फिर भी उधार खत्म नहीं हुआ। वह और रुपये मांग रहे थे। जिसकी वजह से इन सभी ने अरुण की हत्या करने की योजना तैयार किए थे।
एसपी ग्रामीण नरेंद्र प्रताप सिंह के मुताबिक कप्तानगंज थाना क्षेत्र के कोयलसा गांव निवासी अरुण यादव रसूकदार है। वह सूद पर लोगों को रुपये देता है। इन्हीं रुपयों की बदौलत वह अपना अच्छाखासा साम्राज्य खड़ा कर लिया है। पुलिस की गोली से घायल बदमाश अनुराग सिंह ने पूछताछ के दौरान पुलिस को बताया कि उसके घर वाले अरुण यादव से 3.50 लाख रुपये उधार लिए थे। जिसके बदले में उसे अब तक करीब दस लाख रुपये दिया जा चुका है। बावजूद इसके खर्ज खत्म नहीं हुआ। अरुण यादव की राजनीतिक पकड़ मजबूत होने की वजह से कोई जल्दी उसके विरुद्ध बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पाता। इसको देखते हुए अनुराग ने उसकी हत्या का तानाबाना बुना और अपने मित्रों की मदद से उसे रास्ते से हटाने की योजना तैयार की। हालांकि बदमाशों के इस योजना की पुलिस को पहले ही जानकारी हो गई और अंजाम देने से पहले ही अनुराग सिंह और उसका साथी रितेश सिंह मुठभेड़ में घायल हुए और इन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। जबकि इनका प्रमुख साथी विजय विक्रम सिंह फरार हो गया। जिसकी सरगर्मी से तलाश की जा रही है।
पुलिस की सक्रियता से मच गया था हड़कंप
आजमगढ़। एसपी रविशंकर छवि के निर्देश पर पुलिस सक्रिय हो गई और शहर से लेकर गांव देहात तक सघन तलाशी अभियान चलने लगा। तेज धुप के बीच सड़कों पर फर्राटे से दौड़ती पुलिस की गाड़ी और भीतर बैठे अधिकारियों सहित अन्य की तलाशती हुई नजरों को देखकर लोगों में हड़कंप मच गया। लोग यह जानने के प्रयास में जुटे थे कि आखिर पुलिस इतनी सक्रिय क्यों है। इस दौरान एसपी सिटी सुभाष चंद्र गंगवार के नेतृत्व में सीओ सिटी सच्चिदानंद सहित अन्य लोग शहर के भीड़भाड़ वाले स्थानों पर चेकिंग करने लगे। जबकि एसपी ग्रामीण नरेंद्र प्रताप सिंह के नेतृत्व में ग्रामीण क्षेत्रों में तलाशी ली जाने लगी। पुलिस जहां बदमाशों की तलाश में जुटी हुई थी। वहीं लोग यह जानने के प्रयास में दिखे कि आखिर पुलिस इतनी सक्रिय क्यों है।
डीआईजी ने की पुरस्कार की घोषणा
आजमगढ़। पुलिस की सफलता के बाद डीआईजी विजय भूषण, एसपी रविशंकर छवि के साथ जिला अस्पताल पहुंचे। वहां एमरजेंसी वार्ड में भर्ती पुुलिस की गोली से घायल दोनों बदमाशों और सिपाही प्रमोद यादव से मिलकर उनका हाल जाना। इसके बाद पत्रकारों को पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया। इस कामयाबी से गदगद डीआईजी ने पुलिस टीम के 20 हजार रुपये नगद पुरस्कार देने की घोषणा की।
तीन दिनों से डाले हुए थे डेरा
आजमगढ़। कप्तानगंज थाना क्षेत्र के पासीपुर गांव के पास से शनिवार को हुई मुठभेड़ के दौरान जिन दोनों बदमाशों को गिरफ्तार किया गया है। वे अपने तीसरे साथी विजय विक्रम सिंह के साथ बीते तीन दिनों से लगातार क्षेत्र में भ्रमण करते हुए अपने शिकार पर निगाह गड़ाए और घटना को अंजाम देने के बाद भागने की रणनीति तैयार किए थे। संयोग ही रहा कि इनके योजनाओं की जानकारी ऐन वक्त पर पुलिस को हो गई और सतर्कता के चलते पुलिस दो बदमाशों को मुठभेड़ के दौरान गिरफ्तार कर ली। जबकि तीसरा साथी फरार हो गया।
फरार बदमाश विजय विक्रम सिंह फैजाबाद जिले के बाजार गोसाई के पास सुरैनी गांव का निवासी है। वह पेशेवर बदमाश है। विजय विक्रम के नेतृत्व में ही यह सभी काम करते हैं। इनके विरुद्ध पूर्वांचल के विभिन्न जिलों में कई आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। विजय विक्रम सिंह गोली मारकर लूट करने के मामले में काफी दिनों से बस्ती जिला जेल में निरुद्ध था। वह जल्द ही जेल से जमानत पर छुटा है। जेल से बाहर आने के बाद वह अपने साथी की मदद करने आ गया। फरार विजय विक्रम सिंह की तलाश में पुलिस टीम को लगाया गया है। जल्द ही कोई सफलता मिलने की उम्मीद है।