शहर के बड़ादेव स्थित परिषदीय विद्यालय का जर्जर भवन।-प्लान खबर की फोटो
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आजमगढ़। परिषदीय स्कूलों के जर्जर भवन बेसिक शिक्षा विभाग के लिए परेशानी का सबब बने हैं। जबकि कक्षा छठी से आठवीं तक के विद्यालय खुल गए। वहीं एक सितंबर से कक्षा एक से पांचवीं तक भी खुल जाएंगे। जर्जर भवनों से विद्यालय में उपस्थित अध्यापकों की सांस गले में अटकी है। हालांकि शासन स्तर से कई माह पूर्व ऐसे विद्यालयों के ध्वस्तीकरण का आदेश जारी कर दिया गया है। बावजूद अभी इस पर न के बराबर काम हुआ है।
जिले में 2702 परिषदीय विद्यालय हैं। इनमें प्राथमिक 1737, कंपोजिट 481 व उच्च प्राथमिक 484 विद्यालय हैं। इनमें 364 विद्यालयों के भवन जीर्ण-शीर्ण अवस्था में हैं। हालांकि इसके पूर्व जर्जर विद्यालयों की संख्या 434 थे। जिसमें अब तक 105 विद्यालयों का मूल्यांकन हो चुका है। वहीं करीब 70 विद्यालयों का ध्वस्तीकरण हो चुका है। वर्तमान समय में अभी भी ऐसे सैकड़ों विद्यालय हैं जो जर्जर अवस्था में हैं। कुछ कक्षाएं भी संचालित हो रही हैं। वहीं कुछ जर्जर विद्यालयों के बगल में नए भवन तो बना दिए गए लेकिन पुराने अभी जस के तस पड़े हैं। ऐसे में हर समय गिरने का खतरा बना हुआ है।
नीलामी में नहीं कोई पहुंचा
आजमगढ़। जिले में जर्जर पड़े विद्यालयों का मूल्यांकन कराया जाता है। इसके बाद नीलामी की कार्रवाई होती है। विभाग द्वारा जिले के ऐसे 20 विद्यालयों की नीलामी कराई गई जहां कोई पहुंचा ही नहीं। अब इसके लिए उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा जाएगा।
बड़ादेव स्थित भवन भी जर्जर
आजमगढ़। शहर के बड़ादेव स्थित कंपोजिट विद्यालय का भवन पूरी तरह से जर्जर है। बावजूद इसके कक्षाएं जर्जर भवन में ही चलाई जा रही है। बारिश के समय विद्यालय का छत टपकता है। जिससे कक्षाओं में पानी भर जाता है। ऐसे में कभी भी बड़ी दुर्टनाएं हो सकती है।
ब्लाक स्तर पर गठित समिति द्वारा जर्जर पड़े करीब 105 विद्यालयों का मूल्यांकन किया जा चुका है। करीब 70 विद्यालयों का ध्वस्तीकरण भी किया जा चुका है। बहुत जल्द ही बाकी के जर्जर पड़े विद्यालयों का ध्वस्तीकरण कराया जाएगा।
अतुल सिंह, बेसिक शिक्षा अधिकारी, आजमगढ़।