11 साल से न्याय के लिए भटक रही है पीड़िता
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अदालतों में जजों की भारी कमी पर चीफ जस्टिस आफ इंडिया टीएस ठाकुर की प्रधानमंत्री से की गई भावुक अपील के बाद लंबित मुकदमों पर फिर से चर्चा शुरू हो गई है। जिले में भी देखें तो 35 में से आठ अदालतों में न्यायिक अधिकारी नहीं हैं। जबकि कुल एक लाख 22 हजार आठ सौ एक मामले लंबित हैं।
बताते चलें कि जिला सत्र न्यायालय आजमगढ़ में कुल 35 कोर्ट हैं, इसमें 12 सेशन कोर्ट के अलावा एक सीजेएम और शेष मुंसिफ की अदालतें हैं। इसमें से आठ कोर्ट में न्यायिक अधिकारी नहीं हैं। इसमें एक कोर्ट जिला जज का भी शामिल है। एक अप्रैल, 2016 तक जिले के विभिन्न अदालतों में कुल एक लाख 22 हजार आठ सौ एक वाद लंबित हैं। इसमें 49 हजार 801 मामले सिविल वाद, फौजदारी के 8966 वाद सेशन कोर्ट में तथा 64034 वाद फौजदारी के मजिस्ट्रेट के कोर्ट में लंबित है। आठ कोर्ट खाली हैं, उनमें 7 कोर्ट न्यायिक मजिस्ट्रेटों की है। जबकि इन्हीं कोर्ट में ज्यादा मामले लंबित भी हैं।
मऊ जिले के चिरैयाकोट थाना क्षेत्र के यूसुफाबाद गांव निवासी निसार अहमद वर्ष 1975 से आजमगढ़ दीवानी न्यायालय का चक्कर काट रहे हैं। जिस समय निसार ने वाद दाखिल किया था, उस समय उनकी उम्र 37 के करीब थी, आज वह 80 साल के हो चले हैं। इस दरम्यान आजमगढ़ जिला दो भागों में बंट गया। जब निसार आजमगढ़ के निवासी थे। अब आजमगढ़ के बजाए मऊ जिले के हो चुके हैं। निसार ने बताया कि उनके गंाव की कब्रिस्तान बागदासी गांव में है। कब्रिस्तान के रकबे पर उस गांव के विक्रमा आदि कब्जा करने लगे।
इस पर उन्होंने मार्च, 1975 में दीवानी न्यायालय, आजमगढ़ में वाद दाखिल किया। उस समय यह क्षेत्र आजमगढ़ जिले में था। उनका मुकदमा मुफिद साहब देखते थे, अब गुफरान अहमद देख रहे हैं, लेकिन मुकदमे का निस्तारण अब तक नहीं हो सका है। निसार के अनुसार उनके मुकदमे का जल्द से जल्द निस्तारण करने के लिए हाईकोर्ट ने गाइड लाइन भी जारी की है। निसार के अनुसार देर की वजह उनके विरोधी के वकील मामले में जिरह बहस करने के बजाए तारीख लेकर हट जाते हैं। इसका परिणाम है कि मामले में फैसला नहीं आया। इस सब के बाद भी निसार को यकीन है कि आने वाले दिन में न्याय जरूर मिलेगा।