अयोध्या। जेठ की तपती दोपहरी में प्रसाद लिए कतारों में खड़े श्रद्धालु और गूंजते बजरंग बली के जयकारे, हनुमान चालीसा, आरती के स्वरों से भक्तिमय होता माहौल। श्रद्धा, भक्ति और उल्लास का ऐसा ही सैलाब ज्येष्ठ मास के आखिरी बड़े मंगल पर सिद्धपीठ हनुमानगढ़ी सहित शहर के अन्य हनुमान मंदिरों में मंगलवार को देर रात तक उमड़ता रहा। भोर की आरती के बाद मंदिरों में शुरू हुआ दर्शन-पूजन का सिलसिला अविराम रात्रि मंदिर बंद होने तक चलता रहा।
45 डिग्री तापमान के बीच दिनभर मंदिरों से लेकर गली-मोहल्लों और सड़कों तक हनुमान भक्ति हिलोरे मारती रही। सिद्धपीठ हनुमानगढ़ी में तो श्रद्धा का सैलाब उमड़ पड़ा। सुबह हनुमंतलला का फूलों एवं रत्नों से भव्य श्रृंगार किया गया। सिंदूर चढ़ाकर चोला बदला गया। हनुमंतलला की दिव्य छवि का दर्शन पाकर भक्त निहाल नजर आ रहे थे। हनुमानगढ़ी के प्रवेश द्वार पर सुबह चार बजे से ही भक्तों की कतार लग गई। दिन चढ़ता गया तो सूरज की तपिश भी बढ़ती गई, लेकिन इन सबको दरकिनार कर भक्त अपने आराध्य के दर्शन को आते रहे।
मंदिर परिसर में हनुमंतलला के जयकारे सहित हनुमान जी की स्तुतियां गूंजती रहीं। हनुमान चालीसा के स्वर भी गुंजायमान होते रहे। यहां उमड़ी भीड़ को नियंत्रित करने में प्रशासन के पसीने छूट गए। हनुमानगढ़ी में इन दिनों निकास मार्ग का चौड़ीकरण हो रहा है। जिसके चलते प्रवेश व निकास मुख्य द्वार से ही हो रहा है, इससे भीड़ का दबाव मुख्य द्वार पर और बढ़ जाता है। वहीं निकास मार्ग से वीआईपी दर्शन बंद करा दिया गया है। ऐसे में मंगलवार को फिर भी कुछ श्रद्धालुओं को निकास मार्ग से दर्शन कराया जा रहा था। इस पर पुलिस ने सभी श्रद्धालुओं को वापस भेज दिया और दर्शन करा रहे साधु को फटकार लगाई।
हनुमंतलला को लगा सवामनी लड्डू का भोग
अयोध्या। पौराणिक नाका हनुमानगढ़ी मंदिर भी ज्येष्ठ मास के आखिरी बड़े मंगल पर भक्तों से गुलजार रहा। सुबह चार बजे जैसे ही मंदिर का पट खुला, मंदिर हनुमंतलला के जयकारों से गुंजायमान होने लगा। मंदिर के महंत रामदास ने बताया कि सुबह फूलों से हनुमान जी का भव्य श्रृंगार किया गया। साथ ही संगीतमयी हनुमान चालीसा एवं सुंदरकांड पाठ का भी आयोजन हुआ। हनुमंतलला को सवा मनी लड्डुओं का भोग लगाकर भक्तों को प्रसाद अर्पित किया गया।