दुष्कर्म पीड़िता के इलाज के लिए विशेषज्ञों की टीम लगाई गई है। हीमोग्लोबिन कम होने से खानपान का विशेष ख्याल रखा जा रहा है। मेस के अलावा चिकित्सकों की सलाह पर बाहर से भी पोषक खाद्य पदार्थ मंगाए जा रहे हैं।
अयोध्या जिला महिला अस्पताल में भर्ती दुष्कर्म पीड़िता के बेहतर इलाज के लिए चिकित्सकों की विशेष टीम विशेष रूप से लगाई गई है। वहीं, पीड़िता के शरीर में खून की कमी को देखते हुए खानपान का भी खास ख्याल रखा जा रहा है। विशेषज्ञ चिकित्सकों की सलाह पर उसे अस्पताल के मेन्यू के अलावा बाहर की भी पौष्टिक आहार खिलाने की छूट दी गई है।
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पूराकलंदर थाना क्षेत्र के भदरसा में दुष्कर्म के बाद गर्भवती हुई किशोरी को गर्भपात व बेहतर इलाज के लिए पांच अगस्त को केजीएमयू शिफ्ट किया गया था। वहां गर्भपात के बाद हालत में कुछ सुधार होने पर शुक्रवार की देरशाम जिला महिला अस्पताल में फिर से भर्ती कराया गया है।
यहां चौथे तल पर स्थित प्राइवेट वार्ड में कड़ी सुरक्षा के बीच उसे भर्ती किया गया है। साथ ही उसके इलाज व खानपान का खास ख्याल रखा जा रहा है। प्रत्येक शिफ्ट में एक स्त्री रोग विशेषज्ञ तैनात की गई है। वहीं, फिजिशियन, जनरल सर्जन से भी ऑनकॉल परामर्श लिया जा रहा है।
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देखभाल के लिए दो-दो स्टाफ नर्स, वार्डब्वॉय, स्वीपर लगाए गए हैं। प्रशासनिक कार्योँ से फुर्सत मिलते ही सीएमएस खुद मरीज के पास पहुंचकर बीच-बीच में हालचाल ले रही हैं। शनिवार की सुबह दूध, ब्रेड और दलिया दिया गया। बाद में दाल दी गई। दोपहर में तहरी, रोटी, सलाद दिया गया। बीच-बीच में फल व अन्य पौष्टिक आहार भी दिए जा रहे हैं।
सीएमएस डॉ. विभा कुमारी ने बताया कि पीड़िता के बेहतर इलाज व खानपान का इंतजाम किया गया है। ड्यूटी पर तैनात स्टाफ को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि किशोरी की इच्छानुसार चिकित्सीय परामर्श लेकर बेहतर खानपान का इंतजाम रखा जाए। वह स्वयं भी इलाज व खानपान की निगरानी कर रही हैं। अब किशोरी की हालत सामान्य है।
पूराकलंदर थाना क्षेत्र के भदरसा में सामूहिक दुष्कर्म का शिकार होने के बाद 14 साल छह माह की किशोरी गर्भवती हो गई थी। उसके गर्भ में 12 सप्ताह का भ्रूण पल रहा था। 29 जुलाई को सपा नेता मोईद खान और उसके नौकर राजू खान के खिलाफ केस दर्ज होने के बाद उन्हें जेल भेज दिया गया था।
इसके बाद पीड़िता को 31 जुलाई को जिला महिला अस्पताल में भर्ती किया गया था। नौ माह तक शिशु को गर्भ में रखकर प्रसव कराने में अक्षम होने पर किशोरी व उसके परिजनों ने गर्भपात करने की सहमति दी तो बाल कल्याण समिति ने भी संस्तुति प्रदान की।
गर्भपात के दौरान किशोरी की जान को भी खतरा बताया गया। जोखिमपूर्ण इलाज के लिए महिला अस्पताल में बेहतर इंतजाम नहीं थे। इस वजह से किशोरी को पांच अगस्त को केजीएमयू लखनऊ रेफर कर दिया गया था। वहां उसका गर्भपात करने और डीएनए सैंपल लेने के बाद हालत में कुछ सुधार हुआ तो शुक्रवार की देर शाम करीब आठ बजे वापस जिला महिला अस्पताल में भर्ती करा दिया गया है।
महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. विभा कुमारी ने बताया कि किशोरी की हालत अब खतरे से बाहर है। उसे प्राइवेट वार्ड में कड़ी सुरक्षा के बीच शिफ्ट कर दिया गया है। डॉक्टरों की टीम लगातार इलाज व देखभाल कर रही है। वह स्वयं ही इलाज की निगरानी कर रही हैं।