औरैया। ग्रामीण क्षेत्रों में सफाई व्यवस्था बेपटरी है। कागजों में भले ही सब कुछ चकाचक हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। जिले की 477 ग्राम पंचायतों के 771 राजस्व ग्रामों में 35 में सफाई कर्मियों की तैनाती नहीं है। लिखापढ़ी में 819 सफाई कर्मचारी हैं, लेकिन 71 से अधिक कर्मचारी सरकारी कार्यालयों में संबद्ध होकर दफ्तरों की शोभा बढ़ा रहे हैं। कुछ सफाई तो कई बाबू का काम कर रहे हैं।
तत्कालीन मायावती सरकार में शहरों की तर्ज पर ग्रामीण क्षेत्रों में सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए सफाई कर्मियों की तैनाती हुई थी। जिले में 819 सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति की गई थी। शासनादेश के मुताबिक इन सफाई कर्मियों को सफाई कार्य के अतिरिक्त अन्य कार्य न लिए जाने के स्पष्ट निर्देश हैं, लेकिन सरकारी कार्यालयों में करीब 71 से ज्यादा सफाई कर्मचारी सरकारी कार्यालयों में हैं।
477 ग्राम पंचायतों में 771 राजस्व गांव हैं। जिनमें करीब 35 राजस्व गांव ऐसे हैं जहां सफाई कर्मचारियों की तैनात नहीं है। जबकि 12 सफाई कर्मचारी निलंबित चल रहे हैं। डीपीआरओ कार्यालय, पंचास्थानीय निकाय कार्यालय सहित कई कार्यालयों में सफाई कर्मचारी बाबू का काम कर रहे हैं। वहीं कई सफाई कर्मचारी अधिकारियों की अर्दली का काम कर रहे हैं। एक अधिकारी ने बताया कि सरकारी कार्यालयों में कर्मचारियों की कमी है। ऐसे में सफाई कर्मचारियों से काम लिया जा रहा है। वहीं गांव की सफाई व्यवस्था राम भरोसे है।
ग्रामीण क्षेत्रों में नहीं पहुंच रहे सफाई कर्मी
जिले की बड़ी पंचायतों में एक सदर ब्लॉक की ग्राम पंचायत क्योंटरा में करीब चार माह से अधिक समय से सफाई कर्मचारी नहीं पहुंच रहा है। प्रधान मीना देवी ने बताया कि बाढ़ के समय कर्मचारियों की टीम के साथ कुछ दिनों के लिए सफाई कर्मचारी पहुंचे थे। बड़ी पंचायत होने के चलते जगह-जगह गंदगी का अंबार लगा है। इस संबंध में बीडीओ व डीपीआरओ से भी शिकायत कर चुकी हैं। कमोवेश ज्यादातर पंचायतों की यही स्थिति है।
वर्जन
ऐसे राजस्व गांव जहां पर सफाई कर्मचारी नहीं हैं, सभी ब्लॉक के एडीओ पंचायत को पत्र भेजकर जानकारी मांगी गई है। वहां पर सफाई कर्मचारी नियुक्त किए जाएंगे। जो कर्मचारी सरकारी कार्यालयों में तैनात हैं उन्हें उनकी तैनाती वाले स्थानों पर भेजा जाएगा। -संदीप वर्मा, डीपीआरओ