संवाद न्यूज एजेंसी
औरैया। हाईटेक युग में बढ़ रही कंप्यूटरीकृत व्यवस्था और कम कमीशन के साथ ही दिनों दिन बढ़ रहे वर्क लोड से परेशान कोटेदार अब लाइसेंस सरेंडर कर रहे हैं। इसको लेकर दो कोटेदारों ने दो दिन पहले अपने लाइसेंस सरेंडर कर दिए।
वहीं दिबियापुर के एक तीसरे कोटेदार ने लाइसेंस सरेंडर करने को जिला आपूर्ति अधिकारी को प्रार्थना पत्र दे दिया है। ऐसे में आने वाले दिनों में अन्य कोटेदारों की ओर से और भी लाइसेंस सरेंडर होने के संकेत मिल रहे हैं। इससे कहीं न कहीं राशन वितरण प्रणाली प्रभावित होने की संभावना दिखाई दे रही है।
जिले में 611 उचित दर राशन की दुकानें है। शहर के गेहूं चावल के साथ ही अब दुकानों पर बाजरा, ज्वार व चीनी का भी वितरण शुरू कराया गया है। दुकान सरेंडर कर रहे कोटेदारों का कहना है कि गोदामों से कम सामग्री दी जाती है। नए तरीके के इलेक्ट्रानिक कांटे प्रयोग करते हुए राशन वितरण कर पाना उनके बस की बात नहीं है।
उम्र के 60 साल बीत रहे हैं। हाईटेक व्यवस्था को अपना पाना उनके लिए संभव नहीं है। इसी तरह की तमाम अव्यवस्थाओं को लेकर राशन दुकान के झंझट से वह छुटकारा पाना चाहते हैं। उनके इस दर्द में दबी जुबान में कई कोटेदार भी सहमति जता रहे हैं। कमीशन न के बराबर जहमत ज्यादा....।
क्या बोले दुकान सरेंडर करने वाले कोटेदार-
गोदाम से एक डेढ़ क्विंटल कम मिलता राशन
फोटो-13एयूआरपी 23- सत्यनारायण पोरवाल। संवाद
शहर की गुरुहाई मोहल्ला स्थित उचित दर राशन दुकान के कोटेदार रहे सत्यनारायण पोरवाल ने बताया कि उनकी उम्र 66 वर्ष हो गई है। गेहूं, चावल, ज्वार व बाजरा के साथ चीनी वितरित करनी होती है। एक तो गोदाम से कम सामग्री दी जाती है। दूसरी ओर पानी डालकर गीला राशन। कुछ दिनों में ही सामग्री बजन में को हो जाती। एक से डेढ़ क्विटंल सामग्री कम आती है। 620 कार्डधारक दर्ज हैं। उम्र के साथ बड़े वितरण के नए तौर तरीके में दुकान चलाना संभव नहीं हो पा रहा था। ऐसे में दुकान सरेंडर कर दी।
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नए इलेक्ट्रानिक कांटों व नाम मात्र के कमीशन पर काम करने में असमर्थ
फोटो-13एयूआरपी 24- राधाचरन गुप्ता। संवाद
बदनपुर राशन दुकान के उचित दर राशन विक्रेता रहे राधाचरन गुप्ता ने अपनी समस्या जाहिर करते हुए बताया कि राशन वितरण में महज 90 पैसे का कमीशन दिया जाता है। इसके लिए इतनी सामग्री का वितरण व नए इलेक्ट्रानिक कांटों से नए तौर तरीके से काम कर पाना संभव नहीं हो पाएगा। उम्र 60 वर्ष के करीब पहुंच चुकी है। ऐसे में दुकान को सरेंडर करना ही ठीक लगा।
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बोले जिम्मेदार
दो कोटेदारों ने राशन दुकानों को सरेंडर किया है। दूसरी दुकानों में इन्हें संबद्ध किया गया है। कोटेदारों की ओर से दिए गए प्रार्थना पत्र में उम्र का हवाला दिया गया है। अन्य किसी तरह की जानकारी नहीं दी गई है
’-देवमणि मिश्रा, जिला पूर्ति अधिकारी