फफूंद (औरैया)। भाग्यनगर ब्लाक के प्रतापपुर में बारिश के कारण 25 से अधिक कच्चे घर जमींदोज होने से पीड़ितों की गृहस्थी तबाह हो गई। सरकारी मदद की आस लगाए बेघर परिवार दूसरों के घरों में रहने को मजबूर हैं। दो दिन बीतने के बाद भी कोई अधिकारी उनकी खबर लेने नहीं पहुंचा। ऐसे में गांव के लोग ही पीड़ितों के खानपान का ख्याल रख रहे हैं।
प्रतापपुर गांव की अधिकांश आबादी कच्चे घरों में रहती है। बारिश से गांव टापू बन गया है। लगातार बारिश से गांव में कच्चे मकान धराशायी हो गए। कई घरों में चूल्हे तक नहीं जले। ये देखकर गांव के अन्य लोगों ने बेघरों को सहारा दिया। प्रशासन से तो कोई हालात देखने नहीं पहुंचा लेकिन ग्रामीणों ने ही उनका दर्द साझा किया। ग्राम प्रधान संतराम नायक लोगों की मदद के लिए ग्रामीणों के साथ जुटे रहे।
ग्रामीणों ने बताई समस्या
- प्रतापपुर निवासी खजानों देवी ने रोते हुए बताया कि पति रमेश गुब्बारे बेचकर परिवार चलाते हैं। रहने के लिए कच्चा मकान था जो बारिश में गिर गया। बेटी के साथ अब देवर की झोपड़ी में शरण लिए हैं।
- अर्चना पत्नी हाकिम ने बताया कि पति मजदूरी करते हैं। कच्चे मकान में रहती थी। बारिश से मकान गिरने से गृहस्थी तबाह हो गई। पड़ोसी के घर में रह रही हैं। कुछ पैसे जोड़े थे, उससे राशन खरीदकर बच्चों को खाना खिलाया।
- सुमनदेवी पत्नी विनोद कच्चे घर में रहती थीं। पति फेरी लगाते हैं। बारिश में उनका मकान ढह गया। रिश्तेदार के घर में पनाह लिए हैं।
- गांव निवासी आदिराम ने बताया कि घर गिरने के बाद वह सरकारी मदद की आस लगाए हैं। बताया कि कोई भी अधिकारी नहीं आया। भतीजे अरविंद के घर के बाहर पड़ी टिन शेड में शरण लिए हैं।
- रमेश ने बताया कि पत्नी और बेटी को गांव में ही छोड़कर बाहर मजदूरी करने गए थे। घर गिरने की जानकारी मिली तो वह लौट आया। अब रहने के लिए आसरा ढूंढ रहे हैं।
प्रधान बोले
बारिश से प्रतापपुर में 50 लोगों के घर गिरे हैं। इनमें 25 से अधिक कच्चे मकान हैं। अधिकारियों को सूचना दी है लेकिन अभी तक कोई मुआयना करने नहीं आया। गांव के लोग ही पीड़ितों की मदद करने में जुटे हैं। गिरे मकानों की सूची बना ली है। इसे उच्चाधिकारियों को भेजेंगे।
- संतराम नायक, ग्राम प्रधान प्रतापपुर
वर्जन
प्रतापपुर में मकानों के गिरने की जानकारी पर ग्राम विकास अधिकारी और प्रधान को सर्वे करके सूची बनाने का पत्र जारी किया है। साथ ही वह खुद जाकर गांव के हालात देखेंगे। सर्वे के बाद गांव के पात्रों को प्रधानमंत्री आवास और मुख्यमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाया जाएगा। - हरेंद्र सिंह, परियोजना निदेशक/प्रभारी बीडीओ भाग्यनगर।