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बाढ़ प्रभावित गांवों में पटरी पर नहीं लौटी पीड़ितों की जिंदगी

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अयाना (औरैया)। बाढ़ प्रभावित गांवों के हालात पटरी पर नहीं आ रहे हैं। प्रशासन से मिलने वाली मदद भी नाकाफी साबित हो रही है। गांवों में लकड़ी, कंडे और राशन भीग जाने से कई घरों में अभी तक चूल्हे नहीं जल सके हैं। पीड़ित परिवार किसी तरह घरों को फिर बसाने में जुटे हैं।
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यमुना का जलस्तर अब चेतावनी बिंदु 114 मीटर से नीचे है। इससे भले ही जिला प्रशासन ने राहत महसूस की हो, लेकिन बाढ़ पीड़ितों की मुश्किलें अभी बरकरार हैं। गांवों में कई फीट दलदल है।
बाढ़ से कच्चे घर और झोपड़ी धराशायी होने के साथ ही किसानों का अनाज, कपड़े, राशन और गृहस्थी बर्बाद हो गई है। कुछ घरों में न तो बर्तन बचे और नहीं खाने पकाने के लिए राशन। ऐसे परिवारों के सामने बड़ी समस्या बनी हुई है। प्रशासन और राजनीतिक दलों से मिलने वाली मदद भी थम सी गई है। गांव लौटे पीड़ित परिवार घर बसाने में जुटे हैं। वहीं लकड़ी, कंडे और राशन भीग जाने से कई घरों में अभी तक चूल्हे नहीं जल सके हैं।
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जुहीखा मार्ग पर कीचड़, सब्जी लेने नहीं जा पा रहे
बाढ़ के पानी से ज्यादा परेशानी बहकर आए कीचड़ से हो रही है। जुहीखा मार्ग पर कीचड़ भरे होने कारण ग्रामीण सब्जी लेने सेंगनपुर बाजार भी नहीं जा पा रहे। वहीं गांव तक पहुंचने के लिए रास्ता न होने से लोग अपने वाहन सड़क पर ही खड़े कर रहे हैं।
सब्जी की बाड़ी के साथ फसलें बर्बाद
जुहीखा, सेंगनपुर, बीझलपुर के ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने हर वर्ष की तरह इस बार भी सब्जी की बाड़ी और तिल, बाजरा खेतों पर बो रखा था। बाढ़ से सभी फसलें बर्बाद हो गईं हैं। खेतों पर अभी भी पानी भरा है। इससे महीनों अभी कोई फसल नहीं बोई जा सकती। उनके सामने गुजर बसर की परेशानी है।
घरों में कीचड़, सड़क पर पका रहे खाना
जुहीखा की गुड्डी देवी पत्नी राजेंद्र कुमार ने बताया कि घरों तक काफी कीचड़ और सड़ांध होने के कारण मजबूरन उन्हें गांव के बाहर सड़क पर चूल्हा रखकर खाना पकाना पड़ रहा है। वहीं मुहर श्री ने बताया कि घर पर रखा भूसा बह गया। इससे जानवरों को चारे की दिक्कत हो रही है।
स्कूलों में सफाई, ट्रैक्टर से हटाया कीचड़
औरैया। बाढ़ प्रभावित ग्राम फरिहा का सबसे बुरा हाल है। यहां चारो तरफ कीचड़ ही कीचड़ नजर आ रहा है। बाढ़ में बह कर आई बालू और मिट्टी ने घरों को तबाह कर दिया है। शुक्रवार को एडीओ पंचायत शिवकुमार पाठक ने सफाई कर्मियों के साथ पूर्व माध्यमिक विद्यालय के साथ सड़कों की साफ सफाई करानी शुरू की है। वहीं ग्राम प्रधान ब्रजेंद्र कुमार ने ट्रैक्टर से सड़कों का कीचड़ और गंदगी हटवानी शुरू की है। ग्रामीण सफाई की मांग कर रहे हैं।
उधर बीजलपुर निवासी विजय करन शुक्रवार को औरैया से ऑटो से अपना सामान लेकर गांव पहुंचा। उसने बताया कि वह पत्नी अंतिदेवी के साथ रिश्तेदार के घर औरैया गया था। यहां पर करीब 10 दिन से परिवार के साथ रह रहा था। प्रशासन ने बाढ़ पीड़ितों को घर जाने के लिए कोई मदद नहीं की। मजबूर में उसे दो हजार में ऑटो करके गांव लौटना पड़ा। गरीबी में उसे परेशानी उठानी पड़ी है।
पीड़ितों ने बताया दर्द
यमुना में आई बाढ़ से सब कुछ तबाह हो गया है। घर परिवार के साथ जानवरों को चारा देने के लाले पड़े हैं। प्रशासन से मिलने वाली मदद भी नाकाफी साबित हुई है। घर पर सामान डूबकर बर्बाद होने से चूल्हे तक नहीं जल पा रहे हैं। - रवींद्र भदौरिया, बाढ़ पीड़ित
प्रशासन और राजनीतिक दल के लोगों ने शुरू में मदद की लेकिन अब सभी ने हाथ पीछे कर लिए हैं। घर पूरी तरह तबाह हो चुके हैं। जरूरत की तमाम चीजें नहीं हैं। गृहस्थी चलाना मुश्किल हो रहा है। फिलहाल घर दुरुस्त करने में पूरा घर जुटा है। - सुधीर सिंह, बाढ़ पीड़ित
यमुना की बाढ़ से कई घर गिर गए हैं। कई परिवार ऐसे हैं, जिन्हें एक वक्त का खाना पकाना मुश्किल हो रहा है। प्रशासन जल्द लोगों की मदद करे। ताकि बाढ़ पीड़ित परिवार पहले की तरह जीवन यापन शुरू कर सकें। - जयवीर सिंह, बाढ़ पीड़ित
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