औरैया। दिवाली त्योहार को देखते बाजार सज चुके हैं। जिसमें मिठाई की दुकानें भी पूरी तरह तैयार हैं। इन दुकानों पर तरह-तरह की मिठाइयां सजीं हैं, लेकिन किसी भी मिठाई की थाल पर न तो उसके बनाने की तिथि लिखी है और न ही खराब होने की तिथि। खास बात तो यह है कि अधिकारी छापा मारकर कह रहे हैं, लेकिन इस ओर दुकानदार ध्यान भी नहीं दे रहे हैं।
मिठाई की दुकानों पर खराब और बासी मिठाइयां न बिके। इसके लिए बीते साल अक्तूबर माह में खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एसएसएसएआई) ने नियम लागू किया था कि दुकानदारों को बताना होगा कि मिठाई कब बनी और वह कब तक खाने के योग्य रहेगी। मगर जिले में एक भी मिठाई विक्रेता इस नियम का पालन नहीं कर रहे हैं। दिवाली को देखते हुए मिठाई की दुकानें एक सप्ताह से सजीं हैं।
सोमवार को पड़ताल के दौरान देखने को मिला कि किसी भी मिठाई की दुकान में मिठाई की थाल में उसके बनाने की तिथि नहीं लिखी गई है और न ही यह लिखा है कि वह कब तक सुरक्षित रहेगी। मालूम हो कि दिवाली पर्व पर मिठाई की डिमांड अधिक रहती है। जिसको देखते हुए दुकानदारों ने कई दिनों पहले से ही मिठाई बनाना शुरू कर दिया था और स्टाक कर लिया है। इन दिनों बासी और पुरानी मिटाई बेची जाती है। यदि कोई दुकानदार इस नियम को नहीं मानता है तो उसे दो लाख रुपये तक जुर्माना भुगतना होगा।
कब तक सुरक्षित रहेगी कौन मिठाई
24 घंटे - छैना, रसगुल्ला, रसमलाई, राजभोग समेत छैने से बनने वाली मिठाई।
48 घंटे - बर्फी, गुलाब जामुन, नारियल मिठाई, केसर बर्फी, पेड़ा, गुछिया आदि मिठाई।
तीन से पांच दिन - सोहन पापड़ी, बूंदी के लड्डू, मूंग की दाल की बर्फी आदि।
पांच से सात दिन - काजू कतरी, काजू-पिस्ता रोल, बादाम बर्फी, पिस्ता बर्फी, ड्राई फूड्स से बनने वाली मिठाई।
25 से 30 दिन - बेसन के लड्डू, आटे के लड्डू, चावल के लड्डू।
वर्जन
त्योहार को देखते हुए नमूने लिए जा रहे हैं। जिन दुकानों पर अधिक मात्रा में मिठाई में रंग प्रयोग पाया गया। उन मिठाइयों को नष्ट किया गया है। साथ ही दुकानदारों को जागरूक किया है। जो दुकानदार नियमों का पालन नहीं करेंगे। उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। - माता शंकर बिंद, खाद्य सुरक्षा अधिकारी