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किसान करें टमाटर की खेती अच्छा होगा लाभ

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औरैया। टमाटर ऐसी फसल है, जिसका उपयोग अधिकांश होता है। इससे सूूप, सलाद, चटनी, सब्जियों में इस्तेमाल किए जाते हैं। कृषि वैज्ञानिक ने बताया कि कंपनियां टमाटर के विभिन्न खाद्य सामग्री बना रही हैं। बाजार में टमाटर की अच्छी मांग है। किसान वैज्ञानिक विधि से खेती कर उत्पादन से अपनी आय बढ़ा सकते हैं।
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कृषि विज्ञान केंद्र परवाहा के कृषि वैज्ञानिक डॉ. इंद्रपाल सिंह ने बताया कि सर्दी व पाले से टमाटर की फसल में बाधा आती है। फसल के लिए औसत तापमान 18 से 27 डिग्री होना चाहिए। दस डिग्री तापमान से नीचे टमाटर में लाल और पीला रंग बनना बंद हो जाता है। नर्सरी तैयार करने के लिए नवंबर माह उपयुक्त समय है। नवंबर के प्रथम सप्ताह में इसकी बुवाई शुरू की जा सकती है। टमाटर सभी प्रकार की मिट्टियों में तैयार किया जाता है, लेकिन हल्की अम्लीय से लेकर दोमट मिट्टी विशेष उपयुक्त है।
टमाटर की पौध नर्सरी में तैयार किए जाते हैं। इसके लिए लगभग 400 से 500 ग्राम बीज प्रति हेक्टेयर की जरूरत होती है। शंकर किस्म के बीच की मात्रा प्रति हेक्टेयर 200 ग्राम है। पौधों को गलने से रोकने के लिए बीच एग्रोसन जीएन से शोधन करना चाहिए। बीच के क्योरियों में जिसमें पानी की समुचित निकास की व्यवस्था हो। उसमें बीज को छिड़क कर बोना चाहिए। बीज को बोने के समय उन्हें मिट्टी में भलीभांति मिलाकर बोना चाहिए। पहली सिंचाई प्रतिरोपण के तुरंत बाद करनी चाहिए। टमाटर में 15 से 20 दिनों पर सिंचाई करें। जाड़े में पाले से बचाव के लिए दस से 12 दिनों में सिंचाई करें।
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