फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बाढ़ से जमींदोज हुए घरों को देख पथरा रहीं आंखें

विज्ञापन
फोटो12एयूआरपी 37- बाढ़ के पानी में ध्वस्त हुआ कच्चा घर व जमीन पर गिरा पड़ा छप् - फोटो : AURAIYA
विज्ञापन
अयाना (औरैया)। यमुना के बढ़े जलस्तर ने न जाने कितने घरों की झोपड़ी जमीदोज कर दी। राहत शिविरों को छोड़कर वापस गांव लौट रहे लोगों की तबाही का मंजर देख आंखें पथरा सी गई है। बिजली आपूर्ति बहाल न होने से लोगों में रोष बना हुआ है।
विज्ञापन

बाढ़ का पानी गांवों से उतरने के साथ ही अब ग्रामीण भी राहत शिविरों को छोड़कर अपने घरों को लौटने लगे हैं। हालांकि घर पहुंचकर जमींदोज हो चुके कच्चे आशियानों को देख वह परेशान हैं। ऐसे में पीड़ित परिवार खाली पड़ी जमीन देख मन ही मन व्याकुल हो रहे हैं। वहीं, जो घर बच गए उनमें अंदर रखा अनाज व अन्य जरूरी सामान पूरी तरह से बर्बाद हो गया है। यही नहीं बच्चों के स्कूलों की कापी-किताबें भी भीग कर खराब हो गए। अब उनके सामने भी पढ़ाई को लेकर संकट खड़ा हो गया है।
बीझलपुर गांव से बाढ़ का पानी निकल जाने के बाद गांव की विद्युत आपूर्ति जोड़ दी गई है। लोग अपने-अपने घरों की दरवाजे की सबमर्सिबल चला कर खुद भी साफ-सफाई में जुट गए हैं। बीझलपुर गांव में शिवकुमार, ब्रजेश, प्रेमवती, बलदेव प्रसाद के घर बाढ़ की चपेट में आकर गिर गए। सरोज कुमारी का भी घर गिर गया और घर में रखा हुआ भूसा भी बह गया। अब उनके पास जानवरों को खिलाने के लिए भी कुछ नहीं बचा है।
विज्ञापन

अवर अभियंता शिवदत्त ने बताया कि असेवा और जुहीखा गांव में ज्यादा कीचड़ भरा होने के कारण बिजली आपूर्ति शुरू नहीं हो रही है। शेष सभी गांवों की बिजली लाइनें जोड़ दी गयी हैं।
समाजसेवियों ने लंच पैकेट बांटे
समाजसेवी मंगल नायक, राजेश नायक, रोहित नायक, श्यामू ने बीझलपुर गांव पहुंचकर बाढ़ पीड़ितों को लंच पैकेट वितरित किए। इसके साथ ही गांव के लोगों को हरसंभव मदद का भरोसा दिया।
ट्रैक्टरों से सामान लेकर पहुंचे गांव
प्राथमिक विद्यालय में शरण लिए गांव निवासी कमलेश बाबू और शेर सिंह ने बाढ़ का पानी गांव के बाहर निकलते ही सारा सामान ट्रैक्टर पर लादकर वापस अपने घर पहुंचे। जहां वह फिर से अपने परिवार के साथ मिलकर आशियाने को सजाने व संवारने में जुट गए हैं।
राहत सामग्री न दिए जाने का आरोप
जुहीखा गांव निवासी राजेश सिंह भदौरिया, रविंद्र सिंह, विमला देवी, रवि चंद्र, रघुनंदन ने आरोप लगाया कि जिन लोगों के घर डूबे थे उन्हें खाद्यान्न किट वितरित नहीं की गई। जिनके घर नहीं डूबे थे उन्हें किट वितरित कर दी गयी। आरोप है कि गांव में 50 किलो की 70 किट वितरित की जानी थीं लेकिन जुहीखा गांव के हिस्से में सिर्फ 30 किट ही आईं। गांव के मुख्य मार्ग पर कीचड़ भरा होने के कारण गाड़ियां अभी भी गांव तक नहीं पहुंच पा रही हैं। बाढ़ प्रभावित गांव असेवा, गूंज तातारपुर, फरिहा, मिश्रपुर प्रताप सिंह की भी स्थिति इसी प्रकार की बनी हुई है। एसडीएम आजीतमल विजेता सिंह के आदेश पर सभी लेखपाल अपने-अपने क्षेत्र में लोगों को पहुंची हानि का आकलन कर रिपोर्ट तैयार करने में लग गए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें