औरैया। इस समय धान की अगेती व मक्का की खेती की जा रही है। इसके लिए किसानों को खाद की जरूरत है। लेकिन ज्यादातर साधन सहकारी समितियों पर काफी दिनों से खाद उपलब्ध नहीं है। किसान मजबूरी में प्राइवेट दुकानों से प्रति बोरी 20 से 50 रुपये अधिक दर पर खाद खरीद रहे हैं। इससे उन्हें आर्थिक मार झेलनी पड़ रही है। साथ की खेती की लागत भी बढ़ने लगी है।
चदनापुर दयालसिंह में साधन सहकारी समिति से आसपास के 13 से ज्यादा गांव जुड़े हैं। इस समिति पर एक महीने से ज्यादा समय से खाद नहीं पहुंची है। ऐसे में किसानों को साधन सहकारी समिति का लाभ नहीं मिल पा रहा है। मजबूरी में प्राइवेट दुकानों से महंगी दर पर खाद खरीदना पड़ रहा है। किसानों ने बताया कि खाद की जो बोरी उन्हें समिति पर 280 रुपये में मिलती है, वही प्राइवेट दुकान से 20 से 50 रुपये अधिक कीमत पर खरीदना पड़ रहा है। उधर, जिला कृषि अधिकारी आवेश कुमार का कहना है कि दो-तीन दिन में खाद की किल्लत खत्म हो जाएगी। किसानों को खाद की लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा।
किसान विनय पांडेय का कहना है कि मौजूदा सरकारें किसानों के साथ सौतेला व्यवहार कर रहीं हैं। आय दो गुना करने के नाम पर कोरा आश्वासन दिया जा रहा है। समय से खाद न मिलने से किसान मायूस हैं। प्राइवेट दुकानों से महंगे दर पर खाद खरीदकर काम चलाना पड़ रहा है।
किसान रानू दुबे ने बताया कि साधन सहकारी समितियों पर खाद न मिलने से दिक्कत हो रही है। धान की अगैती फसल के लिए इस समय खाद की जरूरत है। प्राइवेट दुकानों से 20 से 50 रुपये प्रति बोरी अधिक दर पर खाद खरीदनी पड़ रही है। प्रशासन इस ओर अविलंब ध्यान दे।
किसान लाखन सिंह ने बताया कि खाद के लिए वह 15 दिनों से समितियों के चक्कर लगा रहे हैं। कभी समिति बंद मिलती है तो कभी वहां मिलने वाले कर्मचारी खाद न होने की जानकारी देकर लौटा रहे हैं। खाद न मिलने से फसलें प्रभावित हो रही हैं।
किसान ओमप्रकाश कुशवाह ने कहा कि सरकार को किसानों की कोई चिंता नहीं हैं। न तो समय पर किसानों को पानी मिलता है और नहीं खाद-बीज मिल रहा। ऐसे में किसानों को खेती में अधिक रुपये खर्च करने पड़ते हैं।