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बाढ़ में बह गए अरमान, तबाही का मंजर देख छलकें आंसू

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घर पहुंचने पर खराब हुआ सामान देखती गृहणी अनीता चौहान। संवाद - फोटो : AURAIYA
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औरैया। यमुना का जलस्तर कम होने के बाद बाढ़ में गृहस्थी गंवाने वाले और बेघर लोग फिर से गांवों की ओर लौटने लगे हैं। बाढ़ के बाद अब उनके सामने समस्याओं का दलदल मुंह बाये खड़ा है। फिर से तिनका-तिनका जोड़ने की चुनौती है। कटी सड़कों, कीचड़ से पटी गलियों और दरकती दीवारों के बीच लोग मलबा हटाकर सफाई में जुट गए हैं। कोई भीगकर बर्बाद हुए अनाज को देख रहा है तो कोई सिसकियां भर रहा है। तो किसी को बेटी की शादी की चिंता सता रही है। यह मंजर यमुना किनारे बसे 24 गांवों का है।
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बाढ़ प्रभावित गांवों में कई जगहों पर विद्युत पोल तक डूब गए थे। सुरक्षा के लिहाज से प्रशासन ने विद्युत लाइन कटवा दी। गांवों में बिजली आपूर्ति ठप है। गांव लौट रहे लोग अंधेरे के बीच खौफ में रात गुजार रहे हैं। बाढ़ के पानी के साथ बहकर आई बालू से सड़कें और नालियां पूरी तरह पट गईं हैं। घरों के अंदर भी यही स्थिति है। जिन गांवों में पानी कम हो गया है। वहां गांव पहुंच रहे लोग रहने की व्यवस्था करने के लिए सफाई में जुट गए हैं। उन्होंने प्रशासन से सफाई की मांग की है, ताकि संक्रामक बीमारियों से बचा जा सके। (संवाद)
पीड़ितों ने बयां किया दर्द
- अजीतमल तहसील के ग्राम असेवटा के हरिकिशन यादव ने बताया कि बाढ़ ने सब बर्बाद कर दिया। घर का सामान बह गया है। एक बक्सा भी बह गया है। जिसमें भेड़ खरीदने के लिए 2400 रुपये रखे थे। परिवार के गुजर-बसर की चिंता सता रही है।
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- शिवकेश ने बताया कि घर में रखा अनाज व पशुओं के चारे के लिए रखा भूसा बह गया।
- रास्ते में खड़ी गीता देवी पत्नी बुद्ध सिंह ने सिसकियां भरते हुए कहा कि कुछ नहीं बचा है। अब लड़की की शादी कैसे करेंगी। एक बेटी की शादी कर चुकी हैं, दूसरी बेटी रुचि की शादी के लिए धीरे-धीरे सामान जोड़ रहीं थीं। बाढ़ ने अरमानों पर पानी फेर दिया।
- सुरेश यादव ने बताया कि बाढ़ से दीवारें चटक गई हैं। घर में रहने पर खतरा है। हाकिम सिंह, संतोषी, हरनाम सिंह, उज्ज्वल सिंह, पप्पू भदौरिया ने बताया कि सड़क से लेकर घरों के अंदर बालू और दलदल है। इससे परेशानी उठानी पड़ रही है।
कीचड़ और विषैले जीवों का भय सता रहा
अयाना(औरैया)। यमुना का जलस्तर मंगलवार शाम पांच बजे तक 115.26 मीटर रहा। ग्रामीणों को अब कीचड़ व विषैले जीवों का डर सता रहा है। आबादी वाले इलाकों से पानी उतरने लगा है, लेकिन गांव के चारों पानी भरा है। गांव में बिजली, पानी की समस्या है। शौचालयों के टैंक भी भरे हैं। यमुना की फिसलन वाली मिट्टी से निकलने में खतरा है। स्वास्थ्य विभाग की टीम गांवों में दवा का छिड़काव कर रही है। सीएचसी केंद्र अयाना के अधीक्षक डॉ. अजय कुमार ने बताया कि गांव फरिहा, बीझलपुर, असेवा, असेवटा, जुहीखा, मई, नौली गांव में दवाइयां वितरित की गईं हैं। गांव बीझलपुर में डॉ. कमल और फार्मासिस्ट राजेंद्र बीमार लोगों का इलाज कर रहे हैं। (संवाद)
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