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10 स्वास्थ्य कर्मी समेत 34 मिले कोरोना संक्रमित

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औरैया। जानलेवा कोरोना की रफ्तार तेजी के साथ बढ़ रही है। शहरी क्षेत्रों के बाद अब गांवों में संक्रमण फैलना शुरू हो गया है। इसकी मुख्य वजह नियमों का सख्ती से पालन न करा जाना बताया जा रहा है। गुरुवार को आई रिपोर्ट में 10 स्वास्थ्य कर्मी समेत 34 लोग संक्रमित पाए गए हैं। जिले में अब सक्रिय केसों का आंकड़ा 266 जा पहुंचा है।
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एक जनवरी से गेल में मिले संक्रमित के बाद शुरू हुआ सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। गेल में लगातार अभी भी संक्रमित मिल रहे है। स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन द्वारा कोरोना संक्रमण को लेकर लगाई गईं बंदिशें भी फेल नजर आ रही हैं। यही कारण है कि पिछले 20 दिनों में संक्रमित मरीजों का आंकड़ा बढ़ कर सवा चार सौ
तक जा पहुंचा। इनमें भले ही लोग गंभीर स्थिति में न हों, लेकिन जिस तरह संक्रमण की रफ्तार बढ़ रही है, इससे आने वाले दिनों में खतरे की उम्मीद जताई जा रही है। स्वास्थ्य विभाग लगातार लोगों को कोविड नियमों का पालन करने और टीकाकरण कराने के लिए जागरूक भी कर रहा है।
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दिबियापुर स्वास्थ्य केंद्र और 100 शैया अस्पताल, बनारसीदास प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में 10 स्वास्थ्य कर्मी संक्रमित मिले हैं। तीन पुलिस कर्मी एसपी आवास, गेल गांव में तीन, एनटीपीसी में दो समेत एरवाकटरा, औरैया शहर, सेहुद भाग्यनगर, ककोर बुजुर्ग समेत 34 लोग संक्रमित मिले हैं।
लगातार मिल रहे संक्रमित लोगों में तमाम ऐसे हैं, जिन्होंने पहली, दूसरी के बाद बूस्टर डोज भी ले रखी है। इसके बाद भी रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। इसको लेकर स्वास्थ्य विभाग गंभीर है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि ऐसी स्थिति में नियमों का पालन करना ही सबसे बड़ा बचाव है।
शहर के 100 शैया अस्पताल के साथ ही दिबियापुर और बनारसीदास स्थित अस्पताल में स्वास्थ्य कर्मी संक्रमित मिले हैं। इनमें कई लोग इनके संपर्क में थे, अब स्वास्थ्य विभाग ट्रेसिंग करा कर सभी की जांच कराने की बात कह रहा है। सवाल है कि कहीं संक्रमित लोग अस्पतालों में पहुंचने वाले व भर्ती होने वाले मरीजों के संपर्क में तो नहीं आए। इसको लेकर खतरा बढ़ गया है।
कोरोना का संक्रमण कम करने के लिए लगातार टीमें काम कर रही है। बाहर से आने वाले लोगों की जानकारी निगरानी समितियों से ली जा रही है। इसके साथ ही टीकाकरण के लिए महाअभियान चलाया जा रहा है। लोगों को लगातार बचाव की सलाह दी जा रही है। डॉ. शिशिर पुरी, एसीएमओ
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