अमरोहा। पिछले तेरह सालों के जमे भ्रष्टाचार के आरोपी सीएमओ के स्टेनो को तबादला निरस्त हो गया है। वार्षिक स्थानांतरण नीति के तहत उनका स्थानांतरण रायबरेली के लिए हुआ था। स्टेनो और एक अन्य बाबू पर आय से अधिक संपत्ति, ऑफिस में गुटबाजी और उच्चाधिकारियों के आदेशों की अवहेलना करने के आरोप हैं। हालांकि इन आरोपों की जांच सीडीओ कर रहे हैं। वहीं अन्य आठ लिपिकों को तबादला यथावत रखा गया है। सूबे में कुल 21 बाबुओं तबादला रद्द किया गया है। जबकि कई लिपिकों को जनपद बदलकर राहत दी गई है।
सीएमओ कार्यालय के स्टेनो विजयपाल सिंह और लिपिक जौहर सिंह पर गंभीर आरोप लगे हैं। आरोपों के मुताबिक दोनों पिछले तेरह साल से कार्यरत हैं। दोनों पर कार्यकाल में विभागीय अधिकारी-कर्मचारियों को प्रभाव में लेकर गुटबाजी कराने, भ्रष्टाचार कर आय से अधिक संपत्ति जुटाने, वित्तीय अनियमितताएं बरते और उच्चाधिकारियों के आदेशों की अवहेलना करने के भी आरोप लगे थे। इस मामले में भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष रामकिशोर चौहान, राज्य पिछड़ा वर्ग आरोग के सदस्य चंद्रपाल खडगवंशी, मुनेश देवी, विधायक महेंद्र सिंह खडगवंशी, तत्कालीन डीएम, एडीएम और विभागीय अधिकारियों ने शिकायतों के समर्थन में साक्ष्य प्रस्तुत कर शासन को एक रिपोर्ट भेजी थी। स्टेनो और दूसरे बाबू पर लगे आरोपों की जांच सीडीओ चंद्रशेखर शुक्ल कर रहे हैं।
15 जुलाई की शाम शासन ने सूबे के 984 स्वास्थ्य लिपिकीय कर्मचारियों के तबादला किए थे। जिसमें भ्रष्टाचार के आरोपी स्टेनो विजय पाल सिंह को रायबरेली और लिपिक जौहर सिंह को लखनऊ भेजा गया था। इसके अलावा सात अन्य बाबुओं के भी ट्रांसफर हुए थे। तबादले के विरोध में लिपिक कार्य बहिष्कार कर विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। इस क्रम में शनिवार की रात निदेशक (प्रशासन) चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं लखनऊ ने एक आदेश जारी किया। जिसमें सूबे के 21 कर्मचारियों के तबादले निरस्त किए गए हैं। जिसमें भ्रष्टाचार के आरोपी स्टेनो ट्रांसफर रद्द हुआ है।
सारे आरोप गलत हैं, जो 56 लाख रुपये के भुगतान प्रकरण में आख्या फाइनल हो चुकी है। जांच में कोई गड़बड़ी नहीं पाई गई है। उन बिल भुगतानों पर मेरे हस्ताक्षर नहीं थे। आय से अधिक संपत्ति जैसे आरोप फालतू की बातें हैं।
- विजय पाल सिंह, स्टेनो सीएमओ अमरोहा