रास्ते की जमीन को लेकर शुरू हुई खूनी कहानी का बृहस्पतिवार को सजा सुनाए जाने के साथ लगभग अंत हो गया। हालांकि, जमीन पर विवाद आज भी है। उम्रकैद की सजा मिलने के बाद भी दोषियों के चेहरे पर शिकन तक नहीं दिखी। खुद की सजा से ज्यादा उन्हें दूसरे पक्ष को मिली पांच साल की सजा से खुशी थी। कोर्ट के बाहर दिनभर दोनों पक्षों के रिश्तेदार और परिचित कानाफूसी करते दिखाई दिए।
चार साल पहले डिडौली कोतवाली क्षेत्र के फरासपुरा गांव में हुई सनसनीखेज वारदात ने उस समय हर किसी को अचंभित कर दिया था। विवाद रास्ते से जुड़ा था, इसलिए घटना के बाद पुलिस और प्रशासनिक की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े हो गए थे। क्योंकि, कई बार शिकायत करने के बाद भी दोनों परिवारों के बीच चल रहा रास्ते का विवाद खत्म नहीं हुआ था। जिम्मेदारों ने भी गंभीरता नहीं दिखाई। आलम यह हुआ कि दो सगे भाइयों के परिवार में खूनी संघर्ष हुआ।
इसमें किसान बाबूराम की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। दोनों पक्ष के कई लोगों को गंभीर चोटें आईं। मामले में पुलिस ने बलवीर पक्ष की ओर से पहले मुकदमा दर्ज किया था। जबकि, बाबूराम की हत्या के बाद बलवीर और उनके परिवार के लोगों के 16 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया। इस मामले की विवेचना तत्कालीन इंस्पेक्टर शरद मलिक ने की। मजबूत साक्ष्यों के साथ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया गया। पुलिस ने हत्या के मुकदमे में दस लोगों की गवाही कराई।
जबकि, बलवीर पक्ष के साथ मारपीट के मामले में सात लोगों की गवाही हुई थी। इसमें डॉक्टर और पीड़ित परिवार के सदस्य शामिल थे। पुलिस ने हत्या के मामले में करीब 162 पेज की चार्जशीट न्यायालय में दाखिल की थी। बृहस्पतिवार को करीब तीन बजे दोषियों को कोर्ट के सामने पेश किया गया। इसके बाद दोनों परिवारों के रिश्तेदार और परिचितों की भीड़ कोर्ट के बाहर लग गई।
कोर्ट ने आखिरी दिन भी दोनों पक्षों को तर्कों का सुना। इसके बाद दोषियों को उनके द्वारा किए गए अपराध में सजा सुनाई और जुर्माना लगाया। इस दौरान सुरक्षा के लिहाजा से बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स तैनात रहा। कोर्ट के बाहर मौजूद दोनों परिवारों के रिश्तेदारों के जुबां पर एक ही सवाल था कि हत्या हुई, सजा हुई लेकिन दोनों परिवारों के बीच रास्ते में दीवार को लेकर विवाद आज भी जिंदा है। मृतक बाबूराम पक्ष ने अपनी दीवार तो खड़ी कर ली है, लेकिन, दूसरे पक्ष की नाराजगी बरकरार है।
427 में सभी आरोपी दोषमुक्त
न्यायालय ने सभी आरोपियों को धारा 427 आईपीसी के अपराध से दोषमुक्त कर दिया है। जबकि अन्य धाराओं में आरोपियों को दोषी सिद्ध किया है।
तीन किशोरों को दस वर्ष की सजा
न्यायालय ने तीन किशोर अपचारियों को हत्या व हत्या के प्रयास में दस-दस वर्ष के कारावास और 99 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। वहीं, दो बाल अपचारियों का मामला किशोर न्याय बोर्ड में विचाराधीन है।
बाबूराम के फेफड़ों में घुस गई थीं पसली की टूटी हड्डियां
हत्या के मामले में मारपीट में सबसे अधिक चोटें वादी मुकदमा राधेश्याम के शरीर पर लगी थीं। उन्हें 21 चोटे आईं, जबकि मृतक बाबूराम के शरीर पर 12 चोटों के निशान थे। उमेश के शरीर पर 18 चोटें आई थीं। पिटाई के दौरान मृतक बाबूराम की पसली की हडि्डयां टूटकर फेफड़ों में घुस गई थी, जो मौत का कारण बनी थीं। उधर, दूसरे पक्ष के चमन के शरीर पर सात, विपुल के शरीर पर सात, देवेंद्र के शरीर पर पांच चोटों के निशान मिले थे।
राधेश्याम की पैरवी बनी सजा में सहायक
मृतक बाबूराम के बेटे राधेश्याम ने अच्छे से पैरवी की। वह सुबह ही तारीखों पर आ जाया करते थे और मुकदमे की कार्रवाई पूरी होने के बाद ही घर जाते थे। कभी-कभार उन्हें घर पहुंचने में अंधेरा हो जाया करता था लेकिन हौसला नहीं टूटने दिया। दोषियों को सजा मिलने के बाद राधेश्याम ने कहा कि आज उन्हें इंसाफ मिला है।
फर्जी मुकदमा नहीं डिगा सका राधेश्याम का हौसला
आरोपी पक्ष की ओर से पूरा प्रयास था कि किसी भी तरह से राधेश्याम फैसला कर ले मगर ऐसा हो नहीं सका। राधेश्याम पर झूठा रेप का मुकदमा दर्ज कराया गया मगर बाद में गवाह मुकर गए और आज तक भी वादी मुकदमा पीड़िता के बयान हीं हो सके।
दोषी चंद्रपाल सिंह को स्ट्रेचर पर लाया गया कोर्ट
हत्या के मामले में दोषी चंद्रपाल सिंह की हालत खराब होने पर उसे स्ट्रेचर पर लेकर कोर्ट रूम लाया गया। न्यायालय ने आरोपी को न्यायिक हिरासत में लेकर जेल भेजते हुए जेलर को दोषी का सही प्रकार से इलाज कराने के निर्देश दिए हैं। बीमार आरोपी को अन्य आरोपियों से अलग जेल भेजा गया है।
सुबह से ही फैसले को लेकर कोर्ट में उमड़ी भीड़
हत्या और मारपीट के मामले में 21 दोषियों की सजा पर सुनवाई को लेकर सुबह से उनके परिजनों का न्यायालय में जमावड़ा लग गया था। परिजन न्यायालय के आदेश के आने के बाद ही अपने-अपने घरों को गए। हर कोई न्यायालय का आदेश जानने को आतुर रहा।
यह समान हुआ था बरामद
अभियोजन पक्ष से बाबूराम की हत्या के मामले में आरोपी चंद्रपाल व पवन के कब्जे लाठी डंडे व माेहित से लोहे का पाइप बरामद होने का दावा किया गया है। जो हत्या की वजह बने।
पांच वर्ष की सजा होने के बाद भी मिली जमानत
मारपीट व हड्डी तोड़ने के मामले में दोषसिद्ध आरोपियों को पांच साल की सजा हाेने के बाद अपराध जमानतीय होने के कारण एक माह के भीतर अपील दाखिल होने तक जमानत दे दी है। कोर्ट ने मारपीट व हड्डी तोड़ने के मामले में दोषी राधेश्याम, उमेश, दिनेश, रचित, दीपक, मोहित, अमित, शिवचंद्र व रामचंद्र को पांच-पांच साल की सजा व अर्थदंड की सजा सुनाई। सजा के बाद दोषियों के अधिवक्ता कपिल चिकारा ने अपने तर्क पेश किए। उनके तर्कों को सुनने के बाद कोर्ट ने इस आधार पर दोषियों को पांच साल की सजा होने के बाद भी जमानत दे दी कि मामले में अपराध जमानतीय प्रकृति के हैं। इसलिए आरोपियों को तीस दिन के भीतर अपील दाखिल होने तक जमानत दी है। हालांकि, विशेष लोक अभियोजक रतनलाल लोधी ने जमानत का विरोध किया था।