कोरोना और ओमिक्रॉन के करीब दो साल बाद विद्यालय खुल गए हैं। विद्यालयों के प्रबंधन ने अब विद्यार्थियों के भविष्य को संवारने की कवायद शुरू कर दी है। निजी शिक्षण संस्थानों ने छात्रों का तनाव दूर करने के लिए काउंसलिंग तक की व्यवस्था की है। छात्रों की उपस्थिति के साथ ही अभिभावकों से भी उनकी दिनचर्या का पता किया जा रहा है। छात्रों ने बताया कि अ़ॉनलाइन के स्थान पर ऑफलाइन पढ़ाई से काफी राहत मिली है।
स्कूल प्रबंधक बोले
- कोरोना और ओमिक्रॉन के दौरान बच्चों को मोबाइल की आदत पड़ गई है। स्कूल खुलने पर विद्यार्थियों का पढ़ाई में मन नहीं लग रहा था और लिखावट की आदत भी कम हो गई थी, जो चिंता का विषय था। कोरोना गाइड लाइन का सख्ती से पालन कराया जा रहा है। इंडोर गेम पर ध्यान दिया जा रहा है। शिक्षकों को विद्यार्थियों के पढ़ाई पर विशेष ध्यान निर्देश दिए गए हैं। -गिरीश बंसल, प्रबंधक लिटिल स्टालर्स एकेडमी
- संक्रमण के बाद स्कूल खुलने पर छात्र-छात्राओं में काफी बदलाव देखा गया है। ट्यूशन पढ़ने में भी विद्यार्थियों की रुचि नहीं रही है। काफी प्रयास के बाद भी कक्षा में विद्यार्थियों की उपस्थिति कम है। अब सब कुछ ठीक रहा तो आने वाले दिनों में छात्रों को पुराने तौर-तरीके से ही पढ़ाई के लिए तैयार कर लिया जाएगा।- अजय टंडन, संरक्षक आरके पब्लिक स्कूल
- स्कूल खुलने के बाद विद्यार्थियों में कई तरह के बदलाव देखे गए। अधिकतर बच्चे ऐसे भी रहे, जिनके पास ऑनलाइन पढ़ाई के लिए मोबाइल नहीं था। यदि किसी के पास था भी तो ऑनलाइन पढ़ाई के दौरान किसी कारण नहीं मिल पाता था। ऐसे विद्यार्थियों की पढ़ाई को पटरी पर लाने का प्रयास किया जा रहा है। ऑनलाइन के बाद ऑफलाइन पढ़ाई शुरू होने पर बच्चे अब काफी खुश दिखाई दे रहे हैं। जल्द ही सुधार के लिए कई और प्रयास किए जाएंगे।- शाह नवाज अंदाज अमरोहवी प्रबंधक ब्रिटिश इंग्लिश स्कूल।
अभिभावक बोले
कोरोना काल से उबरे हुए विद्यार्थी समय से स्कूल जा रहे हैं, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी। बच्चों में अनुशासन व समय से पढ़ने की प्रवृत्ति फिर से पैदा हो रही है। स्कूल प्रबंधकों से उम्मीद है कि कोरोना काल के शुल्क को कम करें या पूरी तरह से माफ कर देें।-राजीव गोले अभिभावक
कोरोना काल में ऑनलाइन पढ़ाई होने के बाद भी बच्चों का शिक्षण कार्य सुचारु नहीं हो सका था। अब स्कूल खुलने से पढ़ाई सुचारु हो गई है। बच्चों के लिए अतिरिक्त कक्षाएं लगाकर उनकी पढ़ाई के नुकसान को कम करना चाहिए।-मेहराब अभिभावक
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छात्राएं बोलीं
- कोरोना काल में ऑनलाइन पढ़ाई से पूरी पढ़ाई नहीं हो पाती थी। अब ऑफलाइन शिक्षण होने से उन्हें बेहतर तरह से पढ़ाई में मदद मिल रही है।-हुरमा कुरैशी छात्रा
- कोरोना काल में शिक्षण कार्य का बहुत नुकसान हुआ है। अब ऑफलाइन पढ़ाई होने से शिक्षा के स्तर में सुधार हो रहा है। साथ ही साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी बेहतर तरीके से हो रही है।-भूमि चौधरी छात्रा