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राष्ट्रीय गान गाकर साथियों के साथ रवाना हुए ओवैस

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डिडौली कोतवाली क्षेत्र के रहने वाले अभय पवार और जावेद अनवर रोमानिया सीमा पर पहुंच चुके हैं। अभय पवार के मुताबिक, रोमानिया सीमा पर करीब 3000 छात्र-छात्राएं हैं। हवाई अड्डे पर अलाउंस कर संकेत दिए गए हैं कि सभी छात्रों को सोमवार की सुबह तक यहां निकाल लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि यदि सभी छात्रों को फ्लाइट मिल जाती है, तो मंगलवार को किसी समय स्वदेश पहुंच जाएंगे। संवाद
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हंगरी के बॉर्डर पर पहुंचे शाह कमाल
अमरोहा नगर के दानिशमंदान निवासी शाह कमाल रविवार सुबह दस बजे हंगरी बॉर्डर पर पहुंच गए हैं। बॉर्डर के आसपास काफी भीड़ होने के कारण उन्हें यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने दो किलोमीटर पहले हॉस्टल में ठहरा दिया है।
उनके पिता डॉ. जमशेद कमाल ने बताया कि शाह कमाल शनिवार रात अपने तेरह साथियों के साथ दो कैब करके हंगरी बॉर्डर के लिए निकले थे, जो रविवार की सुबह करीब 10 बजे सुरक्षित पहुंच गए हैं। बॉर्डर पर काफी भीड़ है। ऐसी स्थिति में उनकी यूनिवर्सिटी के प्रबंधन ने सभी छात्रों को बॉर्डर से दो किलोमीटर पहले अपनी यूनिवर्सिटी से जुड़े संस्थान के हॉस्टल में रुकवा दिया है। अब शाह कमाल का नंबर तीन से चार दिन में स्वदेश लौटने के लिए लग सकता है।
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राष्ट्रीय गान गाकर साथियों के साथ रवाना हुए ओवैस
रजबपुर थानाक्षेत्र के अतरासी कलां निवासी ओवैस चौधरी भी यूक्रेन में फंसे हैं। वह करीब बीस दिन पहले ही यूक्रेन गए थे। लेकिन यूक्रेन पर रूस द्वारा हमला करने के बाद ओवैस रविवार को निजी बस के जरिये रोमानिया बॉर्डर के निकले। इस दौरान उवैस के साथ कई भारतीय छात्र भी मौजूद हैं। रोमानिया बॉर्डर के लिए बस में सवार होने से पहले भारतीय तिरंगे के साथ भारत का राष्ट्रगान गया। इसके बाद सभी छात्र रोमानिया के लिए निकल गए। यहां से भारतीय छात्र अपने स्वदेश विशेष विमान से आएंगे। संवाद
रोमानिया की ओर रवाना हुए धनौरा के दो छात्र, संपर्क नहीं होने से परिजन परेशान
मंडी धनौरा। यूक्रेन में फंसे हिरना खेड़ी के रिफाकत अली और कमेलपुर की रहनुमा के परिजन उनकी वतन वापसी के लिए चिंतित हैं। हालांकि रविवार तड़के दोनों छात्र भारत वापसी के लिए रोमानिया की ओर रवाना हो गए हैं।
रिफाकत के पिता शराफत अली ने बताया कि उनका बेटा पिछले वर्ष 12 अक्तूबर में यूक्रेन गया था। रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते रिफाकत यूक्रेन में फंस गया है। उसने परिजनों को बताया कि उसके पास खाने-पीने के लिए कुछ सामान नहीं है। शनिवार देर रात रिफाकत से हुई परिजनों की वार्ता में उसने बताया कि भारतीय दूतावास के अधिकारियों ने छात्रों को रोमानिया के जरिये भारत भेजने की बात कही है।
रविवार की तड़के रिफाकत रोमानिया की सीमा की ओर रवाना हो गया था, लेकिन उसके बाद से परिजनों का उससे संपर्क नहीं हो पा रहा है। जिससे परिजनों की चिंता बढ़ गई है। उसकी मां शबाना खातून ने बताया कि जब तक बेटे की सकुशल सूचना नहीं मिल जाती। तब तक उनको चिंता सताएगी। दूसरी ओर थाना क्षेत्र के गांव कमेलपुर की रहने वाली रहनुमा सैफी की रोमानिया सीमा की ओर पार हो जाने की सूचना है। रहनुमा के पिता इसरार सैफी ने बताया कि रहनुमा अन्य छात्रों के साथ रोमानिया पहुंच गई है।
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