हसनपुर (अमरोहा)। गंगेश्वरी, दढ़ियाल, रहरा, आदमपुर में 2800 बीघा सरकारी जमीन पर नियम विरुद्ध पट्टों की बात सामने आने के बाद तहसील क्षेत्र के कुछ अन्य गांवों में भी इसी तरह का खेल पता चला है। राजस्व विभाग के सूत्र बताते हैं कि इन गांवों की संख्या 10 से अधिक है। इनमें तत्कालीन अफसरों और कर्मचारियों ने मोटी रकम वसूलकर दो हजार बीघा सरकारी भूमि करीब 400 पट्टों की आड़ में खुर्दबुर्द की गई है।
इनमें दौरारा, चंदनपुर, बिहारीपुर, सतेड़ा, दियावली, धौरिया, जयतौली और पिपलौती सहित अन्य गांव हैं। राजस्व विभाग ने इन गांवों में पट्टों का भौतिक सत्यापन कराने की तैयारी शुरू कर दी है। तिगरिया नादिर शाह के करीब स्थित गैर आबाद गांव सहेरिया में करीब 200 बीघा सरकारी भूमि की श्रेणी बदलकर 35 से अधिक पट्टे किए जाने का मामला जांच के घेरे में है। यहां के पट्टे पूर्व वर्षों में नियमों की अनदेखी कर आवंटित किए गए थे। इसी तरह अल्लीपुर खादर में नदी की भूमि की श्रेणी बदलकर पट्टे आवंटन का बड़ा खेल सामने आ चुका है। अब तक तीन पट्टे निरस्त किए जा चुके हैं।
इसके अलावा पाइंदापुर एतमाली में 500 बीघा सरकारी भूमि पर 80 से अधिक लोगों को पट्टे दिए जाने का मामला भी जांच के दायरे में है। इनमें से कई जमीनों के बैनामे तक करा लेने की मनमानी भी हुई थी। कुछ स्थानों पर पट्टाधारकों के हौसले इतने बुलंद है कि वे अवैध पट्टों पर जारी नोटिस के जवाब के लिए समय मांगने का आवेदन कर रहे हैं। यही नहीं तिगरिया खादर गांव में श्रेणी-3 के तहत किए गए 100 से अधिक पट्टे वर्षों पहले निरस्त होने के बाद भी करीब 400 बीघा भूमि पर अब भी कब्जे बरकरार होने की बात सामने आई है। तहसील क्षेत्र में कुछ स्थान पर वन विभाग की भूमि पर भी अवैध कब्जे हैं। इसी तरह पहाड़पुर वक्काल गांव में करीब 500 बीघा झील की भूमि पर किए गए पट्टे वर्ष 2014 में निरस्त होने के बावजूद कब्जे अब तक नहीं हटाए जा सके हैं।
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कई मामलों की चल रही है जांचः एसडीएम
हसनपुर के एसडीएम हिमांशु उपाध्याय ने बताया कि प्रशासन इस तरह के हर मामले को गंभीरता से ले रहा है। एडीएम न्यायिक के न्यायालय में सुनवाई जारी है। जो वाद धारा 128 के तहत दर्ज होते हैं, उनकी आख्या मांगी जाती है। उनका सत्यापन करके जांच एडीएम को भेजी जाती है। अभी कई मामलों की जांच चल रही है।
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