अमरोहा। युवती की हत्या को आरोप में दर्ज मुकदमे की विवेचना में पुलिस ने नामजद आरोपियों के नाम निकाल कर उसके रिश्तेदारों को आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोपी बनाकर जेल भेज दिया। कोर्ट ने फरवरी 2021 में इन चारों आरोपियों को बरी कर दिया था। कोर्ट ने पुलिस को इस मामले की पुनर्विवेचना और विवेचक के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के आदेश दिए थे। कोर्ट के आदेश के लगभग साढे़ छह महीने बाद भी अभी तक इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई है। इस मामले में सोमवार को पीड़ित पक्ष के लोगों ने एसपी से मुलाकात कर कार्रवाई की मांग की।
यह मामला गजरौला थानाक्षेत्र के एक गांव है। आरोप है कि यहां रहने वाले किसान की पत्नी के किसी व्यक्ति से अवैध संबंध थे। मां के अवैध संबंधों में बेटी आड़े आ रही थी। 14 अगस्त 2017 को युवती का शव फंदे पर लटका हुआ मिला था। इस मामले में युवती के पिता ने अपनी पत्नी बबली और पीतम सिंह यादव के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। विवेचना के दौरान गजरौला ने पुलिस बबली और पीतम का नाम मुकदमे से निकालकर युवती की बुआ कौशल्या, फुफा प्रीतम, फुफेरे भाई शिवम और जोगेंद्र को आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोपी बना दिया। पुलिस ने चारों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया और उनके खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी। शिवम को छोड़कर अन्य तीनों को कुछ माह के बाद जमानत मिल गई। शिवम को मुख्य आरोपी बनाया गया था, इस वजह को उसको जमानत नहीं मिल पाई थी।
यह मुकदमा न्यायालय अपर सत्र न्यायाधीश/त्वरित न्यायालय द्वितीय विद्याभूषण पांडेय की आदालत में विचाराधीन था। करीब दो साल नौ महीने मुकदमा चला। अधिवक्ता अशोक कुमार प्रजापति के मुताबिक 17 फरवरी 2021 को कोर्ट ने अपने फैसले में शिवम, कौशल्या, जोगेंद्र और प्रीतम को दोषमुक्त करार दिया। कोर्ट ने अपने आदेश में मुकदमे की विवेचना पर सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि मामले में विवेचकों द्वारा अपने पदीय कर्तव्यों का निर्वहन ठीक प्रकार से नहीं किया गया। कोर्ट ने राय दी थी कि इस मामले की पुनर्विवेचना कराया जाना न्याय संगत दर्शित हो रहा है। मुकदमे के पुनर्विवेचना की संस्तुति कोट ने अमरोहा के एसपी से की थी। कोर्ट इस मामले के तत्कालीन विवेचकों के खिलाफ कार्रवाई करने के भी आदेश दिए थे। इस मामले में अब तक कोई कार्रवाई नहीं होने पर सोमवार को दोष मुक्त किए गए चारों लोगों ने एसपी से मुलाकात की। एसपी को न्यायालय के आदेश की कॉपी सौंपकर मामले की पुनर्विवेचना और विवेचकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
पीतम और बबली की भूमिका की जांच के भी आदेश दिए थे कोर्ट ने
अमरोहा। कोर्ट ने अपने आदेश में इस मामले में पीतम और बबली की भूमिका के जांच के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि मामले में एफआईआर में नामजद प्रस्तावित अभियुक्त पीतम सिंह यादव और बबली आज तक फरार हैं। अपराध में उनकी भूमिका की जांच की जानी आवश्यक है। क्योंकि वे मामले के तथ्य और परिस्थितियों में पूर्णत: संदेह के घेरे में हैं। संवाद
साढ़े छह महीने से कोर्ट के आदेश को दबाए बैठी है पुलिस
अमरोहा। न्यायालय अपर सत्र न्यायाधीश/त्वरित न्यायालय द्वितीय विद्याभूषण पांडेय की अदालत ने 17 फरवरी को अपना फैसला सुनाया था। साढ़े छह माह का वक्त बीत जाने के बाद भी पुलिस इस आदेश को दबाए बैठी है। अभी तक ना तो मामले की पुनर्विवेचना शुरू की गई और ना ही विवेचकों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की गई है।