जिम्मेदारों की लापरवाही के चलते लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन प्लांट स्थापित करने के लिए जमीन नहीं मिल सकी। बीस लाख रुपये की लागत से तैयार होने वाले इस प्लांट को मुरादाबाद के बिलारी में शिफ्ट करना पड़ा। इस प्लांट से अस्पताल में उपलब्ध सिलिंडरों में ऑक्सीजन की रिफिलिंग करने में सहूलियत मिलती।
शासन ने करीब दो साल पहले जिले के स्वास्थ्य विभाग को लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन प्लांट की सौगात दी थी। ताकि सिलिंडरों में ऑक्सीजन की बाहर से रिफिलिंग न करानी पड़े और जरूरत के समय स्थानीय स्तर पर ही सिलिंडरों की रिफिलिंग की जा सके। इसके लिए करीब बीस लाख रुपये की लागत से प्लांट जिला अस्पताल में स्थापित किया जाना था।
प्लांट के लिए भेजा गया टैंक डेढ़ साल तक जिला अस्पताल परिसर की टीबी क्लीनिक में रखा रहा। इस दौरान महकमे के आला अफसर अस्पताल में प्लांट के लिए जगह ही उपलब्ध नहीं करा सके। लिहाजा अधिकारियों ने जमीन उपलब्ध नहीं होने के संबंध में रिपोर्ट शासन को भेज दी। जिसके बाद शासन स्तर से इस दस हजार लीटर मेडिकल ऑक्सीजन क्षमता का प्लांट मुरादाबाद भेज दिया गया। इसके साथ ही जिले के सरकारी अस्पतालों में मेडिकल ऑक्सीजन की स्थानीय स्तर पर ही रिफिलिंग की बेहतरीन योजना धरी रह गई।
जिला अस्पताल में कुल 120 ऑक्सीजन सिलिंडर
आकड़ों की बात करें तो जिला अस्पताल की ओटी, एसएनसीयू और इमरजेंसी के लिए 36 बड़े समेत कुल 120 ऑक्सीजन सिलिंडर उपलब्ध हैं। इसके अलावा सभी सीएचसी पीएचसी में भी मरीजों के लिए करीब 600 ऑक्सीजन सिलिंडर उपलब्ध हैं। इनकी रिफिलिंग बिजनौर की फर्म से कराई जा रही है। विभागीय स्तर पर प्लांट नहीं होने से ऑक्सीजन सिलिंडरों की रिफिलिंग पर सालाना लाखों रुपये का खर्च आता है।
- जिले में लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन प्लांट स्थापित होना था, लेकिन किसी भी अस्पताल परिसर में प्लांट स्थिापित करने लायक जमीन नहीं थी। इस संबंध में शासन को पत्र लिखकर अवगत कराया गया। जिसके बाद पता चला है कि इस प्लांट को शासन स्तर से ही मुरादाबाद के बिलारी में ट्रांसफर कर दिया है।
- डॉ. एसपी सिंह, सीएमओ