अमरोहा। इस्लाम का मतलब आपसी भाईचारा और मजहबी रवादारी को बनाए रखना है। इस्लाम सभी लोगों को उनके मजहबों की परवाह किए बिना ही भाइयों और बहनों के रूप में अपने दामन में पनाह देता है। ये बातें दारुल उलूम देवबंद से आए मुफ्ती अब्दुल रज्जाक ने कहीं। वह सोमवार रात नगर के मोहल्ला शफातपोता में अनार की ज्यारत के पास मुस्लिम कमेटी अमरोहा के तत्वाधान में परंपरागत जलसा ए सीरते पाक महफिल ए शबे नूर में बोल रहे थे। जलसे की अध्यक्षता सरताज आलम मंसूरी व संचालन हाजी खुर्शीद अनवर ने किया। महफिल का आगाज कारी एहसान व कारी मोहम्मद सालिम ने तिलावते कुरआन से किया। मौलाना साद अमरोही, जुबैर इब्ने सैफी, हाफिज शमीम अहमद, सलीम अमरोही आदि ने नातिया कलाम का नजराना बारगाहे रिसालत में पेश किया।
दिल्ली से आए मौलाना सैयद नामदार अब्बास ने कहा कि कुरआन में अल्लाह तआला फर्माता है कि तुम सब मिल कर अल्लाह की रस्सी को मजबूत पकड़े रहो (यानी कुरआन करीम के बताए गए तरीके और रास्ते पर चलो) और आपस में नाइत्तेफाक्री मत करो। मुरादाबाद से आए दानिश कादरी ने कहा कि वालिदैन को चाहिए कि वह अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए औलाद को बचपन ही से नेक और मुआशरे का बा किरदार फर्द बनाने में अपना किरदार अदा करें।
शब ए बरात की रात तौबा की इस रात को अल्लाह तआला अपने बंदों का पूरे साल का हिसाब-किताब करते हैं। इस दौरान मुफ्ती रिफाकत हुसैन, सदर विधायक महबूब अली, फहीम शाहनवाज, प्रवक्ता मंसूर अहमद सिद्दीक़ी एडवोकेट, महासचिव हबीब अहमद सिद्दिकी, सैयद महबूब हुसैन जैदी, सैयद ओवैस रिजवी, कमर नकवी, हाजी इकरार अहमद, मरगूब अहमद सिद्दीकी, जफर अंसारी आदि मौजूद रहे।