फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

छात्रवृत्ति घोटाले में संलिप्त जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी पर मुकदमा चलाने की मिली अनुमति

विज्ञापन
विज्ञापन
कागजों में पांच फर्जी शिक्षण संस्थान खोल कर जनपद के अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में करोड़ों रुपये की छात्रवृत्ति गबन करने के आरोपी पूर्व जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी हेमराज के खिलाफ शासन ने मुकदमा चलाने की अनुमति दे दी है। इस मामले में पूर्व जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी समेत अमरोहा, मुरादाबाद, संभल के दस आरोपी व्यक्तियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। हालांकि, तत्कालीन जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी ने हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत ले ली थी। मुकदमा चलने की अनुमति मिलने के बाद घोटालेबाज अधिकारी-कर्मचारियों में सनसनी छाई है।
विज्ञापन

सीओ सिटी विजय कुमार राना ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2016-17 और 2017-18 में केंद्र सरकार ने अल्पसंख्यकों के कौशल विकास के लिए छात्रवृत्ति जारी की थी। इसको हड़पने के लिए फर्जी तरीके से पांच शिक्षण संस्थान खोले गए थे। उसमें फर्जी तरीके से छात्र-छात्राओं का दाखिला दिखाया गया था। एक जुलाई 2018 को तत्कालीन जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी हेमराज ने डिडौली, मंडी धनौरा और अमरोहा नगर में पांच शिक्षण संस्थानों के प्रबंधकों के खिलाफ छात्रवृत्ति में फर्जीवाड़े के तहत तीन एफआईआर दर्ज कराई थीं। लेकिन पुलिस ने मामले की विवेचना की तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ। दरअसल अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी ने जिन शिक्षण संस्थानों और प्रबंधनों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। वह सिर्फ विभागीय के कागजों में चल रहे थे। धरातल पर न तो शिक्षण संस्थान थे और न नामजद आरोपी प्रबंधक या प्रधानाचार्य।
वर्ष 2019 में मुकदमों के तत्कालीन विवेचक इंस्पेक्टर रविंद्र सिंह ने छात्रवृत्ति घोटाले का पर्दाफाश किया था। जांच में पता चला कि घोटाले का मुकदमा दर्ज कराने वाले तत्कालीन जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी हेमराज भी लिप्त थे। पूर्व जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी चंद्रभान के हटने के बाद उन्होंने ही अपने बचाव में मुकदमा लिखाया था। पूरे घोटाले में जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी, विभाग का बाबू, बैंकों के ग्राहक सेवा केंद्र संचालकों ने पांचों फर्जी शिक्षण संस्थानों में 1363 छात्रों के नाम पर 2.77 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति का गबन किया था।
विज्ञापन

ये बनाए गए थे गबन मेंआरोपी
पूर्व जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी चंद्रभान श्रीवास्तव निवासी अवंतिका कालोनी मुरादाबाद, मयंक अग्रवाल निवासी जट बाजार अमरोहा, महमूद अली निवासी आशियाना कॉलोनी मुरादाबाद, संजोग अग्रवाल, मोहम्मद आस, अंकित त्यागी उर्फ चिंकित, मुजल्लिम हसन, अजीमुल हसन, नईमुल हसन, हर्षवर्धन निवासी असमोली जिला संभल को कोर्ट के आदेश पर जेल भेजा गया था, जबकि 11वें आरोपी के रूप में पुलिस ने मुकदमे में वादी और तत्कालीन जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी हेमराज निवासी टी-14 नवीननगर मुरादाबाद को भी आरोपी बनाया था। संवाद
ये थे फर्जी शिक्षण संस्थान
तत्कालीन विवेचक इंस्पेक्टर रविंद्र सिंह के मुताबिक अमरोहा में तत्कालीन जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी हेमराज सिंह ने डिडौली कोतवाली में शिक्षण संस्थान उजाला कला केंद्र बुढ़नपुर के प्रबंधक प्रधानाचार्य हिना जमाल के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी, जबकि मंडी धनौरा कोतवाली में सोशल संगीत कला केंद्र के प्रबंधक व प्रधानाचार्य जितेंद्र और रामहंस संगीत कला केंद्र के प्रबंधक प्रधानाचार्य गिरीश चंद के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। अमरोहा नगर कोतवाली में मधुरम संगीत विद्यालय अहमदनगर के प्रबंधक प्रधानाचार्य सुभाष और जागृति संगीत विद्यालय के प्रबंधक प्रधानाचार्य राकेश कुमार के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई थी, लेकिन विवेचना के दौरान धरातल पर कोई भी शिक्षण संस्थान चलता नहीं पाया गया और न ही इस नामों के प्रबंधक प्रधानाचार्य पाए गए थे। जैसे-जैसे विवेचना आगे बढ़ी वैसे ही पूरे छात्रवृत्ति घोटाले का पर्दाफाश हुआ।
0000000000
सरकारी कर्मचारी के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए शासन से अनुमति ली जाती है। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी हेमराज सिंह धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार जैसे गंभीर अपराध में संलिप्त थे, लिहाजा उनके खिलाफ भी मुकदमा चलाने की शासन से अनुमति मांगी गई थी, जो मिल गई है। हालांकि, विभाग के लिपिक मयंक अग्रवाल के खिलाफ अनुमति मिलना बाकी है। गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपी जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी हेमराज सिंह ने हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत ले ली थी। - विजय कुमार राणा, सीओ सिटी
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें