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पैंटून पुल का कैप्सूल डूब जाने से पांच किमी का फेर काटने को मजबूर

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पैंटून पुल टूटने से क्षेत्र के लोगों को अपने गंतव्य तक आने जाने के लिए पांच किलोमीटर का चक्कर काटना पड़ रहा है। इससे उन्हें बेहद दुश्वारियों का सामना करना पड़ रहा है।
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क्षेत्र के दारानगर, भुड्डी वाली, मंदिर वाली, टीकों वाली, शीशों वाली, ढाकों वाली, जाटों वाली गांव बाह नाले और गंगा के टापू में बसे हैं। दिसंबर के बाद बाह नाले में बाढ़ आ जाती है तो उपरोक्त गांवों का रास्ता बंद हो जाता है। आने जाने के लिए अस्थायी रूप से पैंटून पुल लगा बनाया जाता है। पैंटून पुल से ही उपरोक्त गांवों के ग्रामीण अपने ट्रैक्टर ट्राली आदि लेकर गुजरते हैं। पुल को हर साल 15 जून के बाद हटा दिया जाता है।
इसके बाद इन गांवों को आने जाने के लिए नाव का ही रास्ता रह जाता है। अब तक उफान पर चल रहा बाह नाला बीते कुछ दिनों से सूखने लगा। नाले में बहुत ही कम पानी रह गया। जिसके चलते पैंटून पुल के कैप्सूल नीचे बैठने लगे। सोमवार की रात पैंटून पुल से एक ट्रैक्टर ट्राली गुजरा था। चालक द्वारा वजन लदा ट्रैक्टर ट्राली तेजी से दौड़ाने के कारण इसका एक कैप्सूल टूट गया। तीन कैप्सूल दूसरी पार रह गए और छह कैप्सूल इस पार, जबकि टूटने वालो एक कैप्सूल गहरे पानी में डूब गया।
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बृहस्पतिवार को सिंचाई विभाग के जेई कुमुद राजपूत ने मौका मुआयना किया। पाया गया कि पुल टूटने से गंगा के टापू में बसे गांवों से संपर्क कट गया है। टूटे कैप्सूल को पानी से कैसे निकाला जाएगा। जेई ने काम कर रहे कर्मचारियों से भी जानकारी ली। उधर पैंटून पुल टूट जाने के कारण उपरोक्त गांवों के ग्रामीण सुल्तानपुर वाजिदपुर के सामने बने पैंटून पुल से गुजर रहे हैं। इस कारण उनको वाहन लेकर पांच किमी का फेर काटना पड़ रहा है। हालांकि नाले में पानी बहुत कम होने के कारण लोग सीधे ही पार हो रहे हैं। जेई ने बताया कि अज्ञात ट्रैक्टर ट्राली चालक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने को तहरीर दी जा रही है।
चकनवाला सामने दस कैप्सूल वाला पैंटून पुल लगा था। जहां पर पुल के तीन कैप्सूल थे, वहां पर पानी बहुत अधिक है। बताया जा रहा है कि पानी की गहराई 20 फीट से अधिक है। ट्रैक्टर ट्राली के कारण टूट कर पानी में डूबे कैप्सूल को निकालने की काफी कोशिश की गई, मगर नाकाम रहे। स्थानीय गोताखोरों ने बताया कि पानी की गहराई 20 फीट है। जेई कुमुद राजपूत ने बताया कि मौके पर मौजूद क्रेन से कैप्सूल को निकालने की मशक्कत की गई, लेकिन उसे निकाला नहीं जा सका। पानी में डूबे कैप्सूल को क्रेन से बांध रखा है। दूसरी क्रेन मंगाकर उसे निकाला जाएगा। इसके बाद पैंटून पुल को लगाया जाएगा। जिससे लोगों का आवागमन सुगम हो।
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