शुक्रवार सुबह व्रती छठ मैया की पूजा के लिए वासुदेव तीर्थ मंदिर के सरोवर पर पहुंचे। पानी में खड़े होकर छठ मइया की पूजा की। परिवार के अन्य सदस्यों ने भी कपूर, अगरबत्ती जलाकर माथा टेका। छठ माता की पूजा करने के बाद नदी और पोखरे के पानी में खड़े होकर व्रती माताएं भगवान सूर्यदेव के उदय होने का इंतजार करती रहीं। सुबह सूर्योदय के बाद सभी व्रतियों ने सूर्य भगवान को अर्घ्य दिया। इस दौरान कांच ही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाए, केरवा जे फरेला घवद से ओह पर सुगा मडराय..। घाट पर हमहूं अरघिया देइवे हे छठ मइया, कईली बरतिया तोहार हे छठ मइया..। छठ माता के गीतों मंदिर परिसर गूंज उठा।
इस दौरान श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखा गया। वहीं, परिजनों ने आतिशबाजी की। व्रती माताओं ने इसी तरह बेटे, पति और परिवार के अन्य सदस्यों की लंबी उम्र की मंगलकामना की। इसके साथ ही छठ पर्व का समापन हो गया। व्रती माताओं ने घर जाकर शरबत और चाय पीने के साथ व्रत का पारण किया।