बॉलीवुड के मशहूर फिल्म अभिनेता दिलीप कुमार की पत्नी सायरा बानो की ननिहाल हसनपुर के मोहल्ला नवाबान की है। वह कई बार हसनपुर आए थे। सायरा बानो की नानी की शादी अब्दुल वहीद खां से हुई थी। रिश्ते को निभाते हुए नसीम बानो, उनकी बेटी सायरा बानो और दामाद दिलीप कुमार अक्सर हसनपुर आया जाया करते थे। सायरा बानो के नाना अब्दुल वहीद खां ने वर्षों पहले हसनपुर के मोहल्ला नवाबान में कोठी बनाई थी। जिसे वहीद मंजिल नाम दिया गया था।
दिलीप कुमार ने निधन से नगर हसनपुर में वहीद मंजिल सहित पूरे शहर में शोक का माहौल है। सायरा बानो की ननिहाल में उनके रिश्तेदार यूसुफ अली खां के तीन बेटे - महफूज खां, महबूब खां और मतलूब खां थे। महफूज खां परिवार के साथ देहरादून रहते हैं। महबूब खां की शादी नहीं हुई थी। बाद में इंतकाल हो गया।
तीसरे भाई मतलूब खां के छह बेटे मंसूर अली खां, मसरूर अली खां, सिराज खां, उसामा खां, फारुख अली खां और अहम अली खां हसनपुर की वहीद मंजिल में ही रहते हैं। सिराज खां ने बताया कि कोरोना की गाइडलाइन की वजह से वह दिलीप कुमार के इंतकाल पर मुंबई नहीं जा सके।
सायरा की रिश्ते की कद्र की दास्तां लोगों की जुबां पर
फिल्म अभिनेता दिलीप कुमार उर्फ यूसुफ अली आखिरकार इस दुनिया से चले गए। उन्हें हर कोई याद कर रहा है। तहसील बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष मुजाहिद चौधरी बताते हैं कि सायरा बेगम की कुर्बानी, खिदमत और मोहब्बत को निभाने की दास्तान भी लोगों की जुबान पर है। बताया कि अंतिम समय में सायरा बानो ने अपने शौहर दिलीप कुमार की खूब खिदमत की। सायरा बेगम ने ये खूबियां अपनी मां से सीखीं थीं, जिससे हसनपुर जैसी बस्ती और उनकी मां नसीम बेगम की ननिहाल का भी नाम रोशन हो पाया।
अमरोही नान गोश्त के मुरीद थे दिलीप
फिल्म अभिनेता दिलीप कुमार का अमरोहा के कई लोगों से गहरा नाता रहा है। वह अमरोही नान गोश्त के मुरीद थे। अमरोहा निवासी कारोबारी उनके लिए नान गोश्त लेकर जाते थे। अमरोहा के रहने वाले खलीक अहमद मुंबई में कारोबारी थे। वर्ष 1975 के करीब उनकी मुलाकात अभिनेता दिलीप कुमार से हुई थी। दोनों के बीच दोस्ती का गहरा रिश्ता बन गया।
प्रोफेसर तारिक अजीम बताते हैं कि जब भी खलीक अहमद अमरोहा आते थे, जो वह दिलीप कुमार के लिए नान गोश्त जरूर लेकर जाते थे। दिलीप कुमार को अमरोही नान गोश्त बेहद पसंद आया। इसके बाद उन्हें जब भी यह पता चल जाता था कि खलीक अहमद अमरोहा गए हैं, तो वह नान गोश्त जरूर मंगवाते थे।